तुम्हारी लबों से होकर गुजरा जो पल,
फीका लगने लगा ये ताजो – ये तख़्त।
एक पल में सब गुरुर बिखरने लगा,
कितना बड़ा फकीर है ये शहंशाहे-हिन्द।
परमीत सिंह धुरंधर
Category: Love
ताहार नाक बाटे सुन्दर बड़ा हो
माई कहले बारी,
तहसे हम बात ना करीं,
की तू बड़ा बदनाम बड़ा हो.
हमार माई कहले बारी,
तहके घर ले चलीं,
की ताहार नाक बाटे सुन्दर बड़ा हो.
चलअ, हटअ पीछे, हमके मत छेडअ हमके,
बाबुल से पहले मांगअ ई हाथ हो.
देखअ ताहरा खातिर कंगन ले आइल बानी,
पाहिले पहनाएम ई ताहरा हाथ हो.
देखअ हाथे तक रहअ, पहुँचा मत धरअ,
हमार धड़कअता अब दिल हो.
त छोड़अ माई – बाबुल के चिंता,
अब हो जाएगअ सार खेल हो.
परमीत सिंह धुरंधर
मायके में चढ़ती जवानी अच्छी नहीं
तेरी आँखे मुझसे कह रही है,
यूँ साँसों की दूरी अब अच्छी नहीं।
तो छोड़ दे ये शर्म ए गोरी,
तेरी कोरी जवानी अब अच्छी नहीं।
कब तक संभालेंगे बाबुल तुझको,
ढलकने लगा है तेरा आँचल।
यूँ मायके में चढ़ती जवानी अच्छी नहीं।
अंगों में तेरे इतना कसाव,
जैसे मन में छुपा हैं कोई डर.
यूँ डरती – खामोश जवानी अच्छी नहीं।
परमीत सिंह धुरंधर
किसी भी हुस्न में ऐसी विरह की आग नहीं
हम चाहें हुस्न वालों को,
मेरी ऐसी औकात नहीं।
सीधे -सादे इंसानों के लिए,
हुस्न के पास कोई सौगात नहीं।
इससे अच्छा की लगा दे जिंदगी,
अगर खुदा की राह में,
तो कोई बरक्कत हो जाए.
मक्कारी के अलावा,
हुस्न की झोली में कुछ भी नहीं।
कल रात मेरी कलम ने मुझसे कहा,
२५ दिन हो गए,
तुमने मुझे छुआ तक नहीं।
किसी के जिस्म को क्या छुऊँ?
किसी भी हुस्न में,
ऐसी विरह की आग नहीं।
परमीत सिंह धुरंधर
There is no desire left for you as my brain feels attraction for creativity and simplicity.
तुम्हारी आँखे

मेरे इरादे बदल देतीं हैं तुम्हारी आँखे,
मेरे सपने सजा देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
दूरियां जो हैं हमारे दरमियाँ,
उसे कितना छोटा बन देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
सम्पूर्ण से लगते इस जीवन को,
तुरंत, एक पल में, अधूरेपन का एहसास,
दिला देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
कितना भी मयखाने से पी लूँ, उठाकर,
सीने में प्यास जगा ही देतीं हैं तुम्हारी आँखे।
तुम ज्वाला बनके धधकती रहो,
जलाती रहो, मिटाती रहो.
बस यूँ ही कभी-कभी,
हमसे लड़ा लो तुम्हारी आँखे।
परमीत सिंह धुरंधर
Its your eyes, which is keeping me alive. Its your eyes which makes me to try for my dream. Its your eyes which makes me to feel your breath, your closeness. All my feelings, my desire and my energy is due to your eyes. Its only your eyes …only your eyes….that is my life……
तो फिर से वो मंजिल नजर आई
बड़े दिनों बाद याद तुम्हे मेरी आई,
चलो कुछ नहीं,
आखिर तुम परदे से बाहर तो आई.
हम भी मसरूफ थे,
जाने किस मंजिल को पाने के लिए?
तुम दिखे,
तो फिर से वो मंजिल नजर आई.
परमीत सिंह धुरंधर
When I saw your face, I realized my mistake that I had chosen wrong path. My goal is you and I don’t know how I forgot that.
चरित्र
उसने मोहब्बत में ऐसे दिया सहारा,
नाम किसी का, और दिल लिया हमारा।
पैसों के खेल में मेरी ही हुई पराजय,
पर चरित्र के मैदान में सबको था पछाड़ा।
परमीत सिंह धुरंधर
पंखहीन परवाज
एक चूहे ने खोद -खोद के,
खोखला पहाड़ कर दिया।
मगर एक चुहिया की आँखों ने,
उसको भी बेचैन कर दिया।
एक कबूतर ने पंख फैला के,
आसमान चुम लिया,
मगर एक मादा कबूतर ने,
उसको भी पंखहीन परवाज कर दिया।
इश्क़ कर तो फिर खुदा की चाह ना कर,
इश्क़ में तो खुदा भी बेबस है।
परमीत सिंह धुरंधर
There is no happy end in love.
यूँ आँचल में इमली नहीं छुपाया जाता
हर किसी से रिश्ता नहीं बनाया जाता,
हर शहर को यूँ ही नहीं छोड़ा जाता।
नाली और नहर में अंतर है दोस्तों,
जवानी नहीं आने तक नहर पे नहीं जाया जाता।
बचपन मैंने भी गुजारें हैं,
आम और आवंले के खट्टेपन पे.
जब तक कुछ, कहीं ठहर न जाए,
यूँ आँचल में इमली नहीं छुपाया जाता।
मुझसे शिकायत मत करों मेरे बड़बोलेपन की,
अब सच यूँ सीने में दफनाया नहीं जाता।
हुस्न की महत्वाकांक्षाएं बढ़ रही हैं,
पर्दा, शर्म, चरित्र और पुरुष को मिटाने की,
मेरी कलम से भी अब ये बोझ नहीं उठाया जाता।
मैं यूँ ही बैठा रहूँगा तेरे इंतज़ार में उम्र भर,
मुझे डूबने का गम नहीं,
पर किनारों पर अब नहीं रहा जाता।
परमीत सिंह धुरंधर
There are some work which one should not do until time comes. However, people like to do that just for the shake of experience but refuse to take the responsibility. They hide and dont like if people point towards it.
मेरा अपना कोई घर क्यों नहीं है?
जो तन्हा कर गए हमें उम्र भर के लिए,
अब बरसों बाद मिले तो पूछते हैं,
मेरा अपना कोई घर क्यों नहीं है?
बहुत मासूमियत है, उनकी आँखों में आज भी,
तभी तो कह रहे थे,
मुझे उनकी तरह बच्चों से प्यार नहीं है.
Parmit Singh Dhurandhar
Yesterday, I met her and she asked why do not I have my family yet. With all her innocence, she herself gave the reason within a second that I do not love children like she does.