Shambhavi:A promise impeccable


A promise impeccable
By me to you
A promise to be by your side true
A promise to be together by life’s
thick and thin,
A promise to love till the life’s brim,
A promise to walk hand in hand,
A promise to be honest in tiniest
strand,
A promise to be there
In your hardest times,
A promise to share your lovliest
rhymes,
A promise from dawning tday till
Tomorrow,
A promise to be here even if you
go,
A promise impeccable from me to
you

Written by the sweetest person in this world for me. Its a memory I will always cherish.

Parmit Singh Dhurandhar

कभी – कभी मेरे ह्रदय में बेदना उठती है


कभी – कभी मेरे ह्रदय में बेदना उठती है,
मैं सीमा का प्रहरी और तू आँगन की एक कलि है.
मैं अपने स्वार्थ वस बंधा हूँ तुझसे,
तू निस्वार्थ मन से मेरे संग कष्ट उठाती है.
कभी – कभी मेरे ह्रदय में बेदना उठती है.
तुमने काटी हस कर बरसों एक ही साड़ी में,
और लाने को नयी पोशाकें मेरे लिए,
होली में, मेरी हाथों को पैसे थमाती है.
मैं नहीं दे पाया तुम्हे कभी भो कोई खुशियाँ,
मगर तू जिन्दी के इस साँझ पे भी,
मेरी हर खुसी पे मुस्काती है.
कभी – कभी मेरे ह्रदय में बेदना उठती है,

परमीत सिंह धुरंधर

खेल


ये इश्क़ – मोहब्ब्बत क्या है,
बस दो जिस्म का खेल.
हम खेले तो धोखा,
और वो खेले तो प्रेम।
वो छोड़े,
तो हम में ही कुछ कमी है,
और हम छोड़ दें,
तो हमें नहीं है उनकी क़द्र।

परमीत सिंह धुरंधर

विश्वामित्र और मेनका


मुझे कोई उपेक्षा नहीं,
की तुम सीता – सावित्री बन के रहो,
मगर ये भी तो कहो,
जब कह ही रही हो खुद ही,
की अब तक कितनो को,
सीता – सावित्री बनके छला है.
मैं उन पंडितों में नहीं जिन्हे बस,
विश्वामित्र का दम्भ ही दिखा है,
मैं वो पंडित हूँ,
जिसकी कलम ने हमेसा,
मेनका को बस चरितहीन ही लिखा है.
भूख से बिलखते बच्चे को जिसने छोड़ा,
बस इंद्रा और सवर्ग के चाह में,
लिखते रहे सब उसको बस नारी की विवसता,
मैंने उसको बस व्याभिचार ही लिखा है.

परमीत सिंह धुरंधर

आँखें


बदल दे जो खून को वो रिस्ता गुनाहों पे चलने को मजबूत करता है,
ये उनकी आँखें हैं दोस्तों जो मुझे हर गुनाह करने को मजबूर करता है.

परमीत सिंह धुरंधर

Is there any way?


Is there any way?
To win your heart again,
Just let me know,
Just let me know.
Even the moon needs so many stars,
To make a beautiful night,
My life has no meaning,
Without your smile.
Is there any way?
To make it again,
Just let me know,
Just let me know.

Parmit Singh Dhurandhar

कड़वा सच


लडकियां बस अपने आशिकों की मौत चाहती हैं,
उनके आंसू, उनके दुःख और उनकी लावारिस लाश चाहती हैं.
शान से कहती हैं की उनको सती – सावित्री ना समझें,
मगर सती – सावित्री होने का फिर भी ढोंग करती हैं.
शादी के मन्त्रों पे हंसने वाली हर लड़की,
तीस के बाद शादी के महत्त्व की बात करती है.
और वो लौटा रहीं हैं एक – एक करके अपने पुरस्कारों को,
जिस दहसतगर्दी के खिलाफ एक जुट हो कर,
उन्ही दहसतगर्दीयों को, अपनी जवानी में,
अपने आँचल में शयन-सुख प्रदान करती हैं.
लडकियां बस अपने आशिकों की मौत चाहती हैं,
उनके आंसू, उनके दुःख और उनकी लावारिस लाश चाहती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

पिता के प्यार का प्याला


हर पुत्र को पिता के प्यार का प्याला मिलना चाहिए,
ए खुदा,
जब तक पुत्र की प्यास न मिट जाए,
पिता – पुत्र का साथ बना रहना चाहिए।
सर्प – दंस से भी ज्यादा जहरीला है,
पिता से पुत्र का विछोह।
ए खुदा,
इस जहर का भी कोई तो काट होना चाहिए।

परमीत सिंह धुरंधर

छावं


जिन बाहों के लिए वो छोड़ गयीं,
मेरे घर के दरवाजों को.
उसी टूटे – फूटे दरवाजों की छावं में,
अपनी मसरूफियत से दूर सुस्ता लेती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


कसम क्या दे उन्हें अब मोहब्बत का,
वो दिन थे जब हम जला करते थे.
अब ये राते हैं,
जब वो जला करती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर