जीवन बंजारा हो


नहीं धरा पे कभी-कहीं, कोई लिए रूप हां तुम सा हो
बनो तुम ही बस मेरी प्रियसी, या फिर जीवन बंजारा हो.
अधरों पे मेरे गिरे अमृत तो बस तुम्हारी अधरों से
या रह जाए अटल प्यास मेरी, या फिर तेरे वक्षों का सहारा हो.

Rifle Singh Dhurandhar

पिता तुम्हारी चरणों में


पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है.
पिता तुमसे बिछुड़कर अब मेरा जीवन धूल सामान है.
कहाँ मैं फिर उड़ा कभी, कहाँ अब वो मेरा आसमान है?
दाना तो चुग ही लेता हूँ, पर कहाँ अब वो मेरी उड़ान है?
पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है.

एक -एक करके हार रहा हूँ, हर युद्ध मैं बिना आपके रण में
विफल हो रही है मेरी हर चेष्टा, अटल मेरा परिणाम है.
विनती अब बस इतनी ही है, अगर सुन रहा है विधाता
हर जन्म में पुत्र आपका रहूं, हृदय की बस ये ही पुकार है.
गोद में तुम्हारे जो अमृत मिला, वो कंठ पे बन के अनंत प्यास है.
पिता तुम्हारी चरणों में है, दुनिया में जन्नत जिसका नाम है

Rifle Singh Dhurndhar

Lily from a valley


Lily from a valley
Taught me a dance
How to make a move
While a girl is in arms.

With every good move
She gave a kiss as a reward.
At the beach near Santa Monica
She told,
“you can do whatever you want.”

Rifle Singh Dhurandhar

Kiss in Mumbai


The girl was going easy
making me crazy.
That night was in Mumbai
we were on the road.
Within a second
she gave a kiss like a storm.

Before that moment
I was devastated and a hopeless man.
She gave the sweetest
shortest-shocking moment
which I desired again.
The long 15 years are like a dry river.
The memory of that night
brings a monsoon with cold breeze and rain.

Rifle Singh Dhurandhar

Honey, I want to see


Let me be your darling
And wish you
Good morning.
Honey, I want to see
Your smile
Every morning.

I cannot wait
Till the summer
To make our story
Hot and bouncing.
Honey, I want to see
Your smile
Every morning.

Let’s go to jogging
You would be on my left side
And I would be on your right side.
Together, we will do
Things that are sweet and steaming.
Honey, I want to see
Your smile
Every morning.

Rifle Singh Dhurandhar

मोहब्बत


मोहब्बत यहाँ पे, ना किसी की हुई है
ना कोई मोहब्बत में बसा ही कहीं हैं.
लगा लो हाँ दिल को घडी -दो -घडी बस
उम्र भर यहाँ तो ना कोई किसी का.

Rifle Singh Dhurandhar

अश्क तस्वीर बना देंगें


मुझसे ना पूछ
ए जमाना
मेरे महबूब का नाम.
मेरे अश्क
उसकी तस्वीर बना देंगें।

तुम्हे क्या पड़ी
मेरे दर्द की?
उसका रूप
तुम्हारे दिल में भी
दर्द जगा देंगें।

लौट गए इतने सावन
मेरे दर से
अब बहारें आके भी
क्या कर लेंगी?
जो वो अपना घूँघट उठा देंगें।

Rifle Singh Dhurandhar

तन्हा हूँ पिता


ज़माने की भीड़ में इतना तन्हा हूँ पिता
की मेरी अंगुलियाँ भी एक -दूसरे को नहीं जानती।

Rifle Singh Dhurandhar

तेरे प्यार में वो बबिता


कवि लिख रहा है कविता, तेरे प्यार में वो बबिता।
तू सुनती नहीं तो, दिल जग को सुना रहा.

फिर ऐसा दर्द न, किसी प्रेम को मिले।
जैसा दर्द पा कर, दिल मेरा तड़प रहा.

जब – जब दिल हुआ घायल, मैंने खरीदे थे पायल
दिल सारे पायलों को आज तोड़ रहा.

फिर तन्हाई में कोई जिंदगी ऐसे ना गुजरे।
जैसे दिल ये मेरा तन्हाई में गुजर रहा.

Rifle Singh Dhurandhar

पिता की ये काया


जुल्फों का तुम्हारे जब घना होगा साया
कहाँ तुम्हे याद होगा पिता की ये काया?
आँखों में शर्म और मुख पे होगी जब चंद्र की छाया
कहाँ तुम्हे याद होगा पिता की ये काया?
दो ही पलों का, बस यह मोह -माया
कहाँ तुम्हे याद होगा पिता की ये काया?

Rifle Singh Dhurandhar