किस्मत


नीचे गिरना किस्मत का ठगना नहीं है,
कभी कभी नीचे गिरने वालों को ही जन्नत मिलते हैं.
आँखों से दो आंसू ढलके, गालो पे सुलगते हैं,
जो विरले होते हैं, वो गिरकर होंठों को चूमते हैं,
जो होते हैं और भी किस्मत के धनी,
वो और नीचे गिरकर, वक्षों में बसते हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मत


किस्मत अच्छी कौन लाया है,
सबने यहीं पे शतरंज बिछाया है.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मत


तेरी पलकों पे सबेरा, तेरी पलकों से मेरी शाम है,
पर मेरी किस्मत में एक रात ही नहीं।
रोजा रखता हूँ, सजदा करता हूँ,
सब दिया मौला ने पर मेरी किस्मत में जन्नत ही नहीं।

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


नजरो से सियासत होती है,
अक़्ल तो बजीर रखते हैं.
जुदाई का नाम है मोहब्बत,
जोड़े वाले तो बस तकदीर रखते हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

बढ़ा चल-बढ़ा चल


दर्द ही अगर जिंदगी है तो मोहब्बत खुले आम कर,
शौक ही अगर तेरा यह ही है तो बेवफाई का न गम कर.
हौसले अगर पस्त ना हुए हो तेरे तो बढ़ा चल, बढ़ा चल,
वो किसी और की डगर तू एक नयी थाम कर.
खूबसूरत चेहरे चाँद से और आँचल उनका बादल सा,
बरस गए तो किस्मत तेरी वरना नए मानसून का इंतज़ार कर.
शहीद हुए कितने इन राहों में कौन आंसू बहता है,
मौत से जो निर्भय है वो ही हुस्न से दिल लगता है.
बेवफाओं की इस बस्ती में कितने उजड़ गए,
किस -किस का जिक्र करें और कहाँ -कहाँ करें।
तू अपनी सोच, मंजिल पे नज़र रख, बढ़ा चल-बढ़ा चल,
वो किसी और की डगर तू एक नयी थाम कर.

 

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मत


किनारों की चाहत में तैरने वालो में हम नहीं,
बैठें हैं मज़धार में, डूबनें वालों में हम नहीं।
कष्ट होगा मुझे जितना लिखा हैं,
मोतियों को पाने से किस्मत बदलती नहीं।

 

परमीत सिंह धुरंधर

वक्त और किस्मत


वक्त के बदलने का इंतज़ार मत कर मुसाफिर,
वक्त और किस्मत में एक ही भेद है.
वक्त किसी का मोहताज़ नहीं होता,
और किस्मत पे किसी का जोड़ नहीं होता.

 

परमीत सिंह धुरंधर