कब तक मैं देखूं दर्पण को,
ए माँ कह दे बाबुल से,
अब मुझे पराया बना दें.
तू जो देती है यूँ रोज-रोज,
नयी-नयी मुझे चूड़ियाँ,
वो भी पूछती है रातों को,
कब बजेगी मेरी शहनाइयां.
कब तक मैं सोऊँ यूँ किवाड़ भिड़ा के,
ए माँ कह दे बाबुल से,
अब मुझे डोली में बिठा दें.
भाभी छेड़ती है,
घींच के चुनार मेरी,
सखिया पूछती है चिठ्ठी में,
कब मैं पता बदलूंगी.
कब तक मैं निकलूं, काजल लगा के,
ए माँ कह दे बाबुल से,
अब मुझे परमीत सा साजन दिला दें.
Category: Marriage
प्रथम-मिलन III
पलकों पे इतना,
भी न शर्म लाइए,
इन जवाँ रातों को,
न यूँ सुलाइए।
प्यास जो हैं मेरे,
इन ओठों पे,
आज अपनी लबों से,
उसे चुरा लीजिये।
छूने से ही अगर,
इतना सिमट जाएंगी,
जाने फिर वो घड़ी,
अब-कब आएगी।
आंचल को इतना,
भी न तन से बांधिए,
इन जवाँ रातों को,
न यूँ सुलाइए।
तोड़ कर,
किनारों को अपने,
दरिया को आज,
परमीत के सागर में,
मिल जाने दीजिये।
प्रथम-मिलन II
ढल जाने दीजिये,
ढल जाने दीजिये,
आँचल को मेरे,
ढल जाने दीजिये।
कब तक मैं सम्भालूँ,
ये शर्मो-हया,
आज, अभी, इसे,
यहाँ टूट जाने दीजिये।
सीने में दबा के,
आँचल में छुपा के,
रखा है बरसों से,
जिसे राहों में बचा के,
आज, अभी, उसे,
यहाँ लूट जाने दीजिये।
ढल जाने दीजिये,
ढल जाने दीजिये,
आँचल को मेरे,
ढल जाने दीजिये।
कब तक मैं ही रहूँ,
बंध के रिवाजों से,
अरमानों को अपने,
यूँ दफना के,
जल रही है दिया,
जो कई रातों से,
आज, अभी, उसे,
यहाँ बुझ जाने दीजिये।
ढल जाने दीजिये,
ढल जाने दीजिये,
आँचल को मेरे,
ढल जाने दीजिये, परमीत।
प्रथम-मिलन I
न देखिये,
मुझे प्यार से,
कि हया अभी,
इन आँखों में है.
तन तो आ गया,
बन के दुल्हन,
मन अभी भी,
उस आँगन में है.
न छेड़िये,
मेरे दिल को,
कि उसमे,
अब भी, परमीत
बाबुल ही है.
दूल्हा चली: बोका आ लोला
ए माई हो, बाबुल से कह द,
कर देस हमर बिदाई हो,
ए माई हो.
दूल्हा चली, कौनों बोका आ लोला,
पर मत करिहन, कौनो केजरीवाल,
संग हमर सगाई हो.
ए माई हो.
अरे कहे हो बबुनी, बोल अइसन बोलअ तारु,
कतना छाईल बा महंगाई हो,
तबे तो छेडले बा केजरी लड़ाई हो,
दुनिया करता कतना देखअ बड़ाई हो,
कइसन भाग्य होई कि तहार,
कि बंबू तू ओकर लुगाई हो.
ए माई हो, ताहर उम्र गइल निकल,
ताहरा ना नु ई बुझाई हो,
कहिवो पलट जाई, कहिवो सुलट जाई,
हद त तब होई, जब कही उ हमके पराई,
अ पराई के कही आपन लुगाई हो.
ए माई हो.
अरे खाई हमार, और दुसरा के,
आँगन में बिछाई आपन चारपाई हो.
ए माई हो, बाबुल से कह द,
कर देस हमर बिदाई हो,
ए माई हो.
दूल्हा चली, कौनों बोका आ लोला,
पर मत करिहन, कौनो केजरीवाल,
संग हमर सगाई हो.
मेरे यार की शादी है…
शादी होगी Crassa की,
दुल्हन बनेंगी मेरी भाभी,
नाचेंगे Crassa भैया,
और,
शहनाई बजायेंगी मेरी भाभी.
कितनी रात तरपे हैं,
और,
कितने दिन हैं जागें,
भटके -भटके , जंगल-जंगल,
काम-क्रोध सब साधे.
टूटेगा अब बांध सब्र का,
मीठे बेर खायेंगे,
और,
चुन-चुन, खिलाएँगी,
बनके सबरी, मेरी भाभी….Crassa