हाँ -पे-हाँ कहलवाया है


सारी रात,
सारी रात दिया जलाकर,
बलम ने मुझे बस सताया है.
टूटी एक – एक कर,
टूटी एक – एक कर चूड़ी कलाई में,
निर्मोही ने ऐसे नचाया है.
ना सोई,
ना सोई न ही करवट बदल पाई,
बस हर घड़ी हाँ -पे-हाँ कहलवाया है.
सारी रात दिया जलाकर,
बलम ने मुझे बस सताया है.

परमीत सिंह धुरंधर

पत्नी


गले – से – गले मिलके,
तुमने संभाला है ओठों को.
वरना हम तो बहक ही चुके थे,
देख, शहर में मयखाने को.
मिलती है अनगिनित परियाँ,
रोज, मेरी रात बसाने को.
तुम ना होते तो बिक ही जाते,
आँचल उनका सजाने को.
कई साल बीते, यूँ ही,
एक ही साड़ी पहने- पहनते.
और हर मास, मुझे नया,
सूट तुम सिलवाती हो.
ये तुम ही हो जिसने बचाईं है,
दीवारें मेरे घर की.
पर दुनिया भर में कहती हो,
नाम मेरा, अहम मेरा बचाने को.
बाहों – में – बाहें डालकर,
तुमने ही बचाया है जीवन को.
वरना हम तो मिट चुके थे,
कब का, खाते – खाते राहों में ठोकरों को.

परमीत सिंह धुरंधर

Chaval and Curry


Let us marry,

Let us marry.

You will cook chaval,

And I will make curry.

Whether salt or sugar,

We will eat together,

And have a baby.

Let us marry,

Let us marry.

You will cook chaval,

And I will make curry.

Parmit Singh Dhurandhar

हर रात जब डूबना ही है


बिखर जाती है काजल,
जब भी डालूं आँख में.
क्या बांधू गजरा,
कैसे इन जुल्फों में.
हर रात टूटती हैं,
मेरी ही आगोस में.
चूड़ी, कंगन और झुमके,
सब उदास है.
कितना भी सम्भालूँ,
इन्हे.
चोर ले ही जाता है,
हर रात उतार के.
जल रहा है दर्पण,
मेरे विरहा की आग में.
कई मास बीते यूँ ही इसकी,
बिना निहारे अंगो को मेरे.
क्या सजाऊँ इनको,
किसी खुसबू से.
हर रात जब डूबना ही है,
इनको फिर पसीने में.

परमीत सिंह धुरंधर

माई के दुलारी पिया के आस में


धीरे – धीरे मनवा विभोर भइल बा,
हल्दी चढ़त, रंग निखर गइल बा.
गावं – गावं उमरत नदी रहली जे,
आज उनकर कोठारी में पड़ाव भइल बा.
भूख मिटल, प्यास छुटल, देखत – देखत,
बाबुल के आँगन के चिड़िया उड़ गइल बा.
एगो हल्दिया, अइसन मिलल रे,
तन पे चढ़ल, आ मन रंगल रे.
काजल फीका पड़ल, गजरा फीका पड़ल,
देखत – देखत, दर्पण भी सौतन भइल बा.
धीरे – धीरे मनवा विभोर भइल बा,
हल्दी चढ़त, रंग निखर गइल बा.
माई के दुलारी पिया के आस में,
जल अ तारी चिपरी जैसे आग में.
नाज – नखरा रखस योवन पे जे,
उनकर अपने अंग – अंग से अब बैर भइल बा.
धीरे – धीरे मनवा विभोर भइल बा,
हल्दी चढ़त, रंग निखर गइल बा.

परमीत सिंह धुरंधर

बकलोल बैल


बैल, सैया हमार,
बकलोल रे.
सखी हमार भाग,
फुटल मिलल रे.
लाख मन के योवन,
चोलिये में रह गइल.
सैया बथान में,
पुआल देखे रे.
देवरानी दही पे,
रोज छाली चखे.
नन्दी घूम-घूम के,
गावं में दावँ मारे रे.
जलअता योवन हमार,
चूल्हे की आंच पे.
सैया दुआर पे,
तास खेले रे.
सखी हमार भाग,
फुटल मिलल रे.

परमीत सिंह धुरंधर

लड़की काश्मीर की


तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा खेल ले थोड़ा-थोड़ा,
ये खेल प्रेम का.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा घर बसा लें,
हम दिल्ली में यहाँ।
तुम धीरे-धीरे चलना,
हर सुबह मुस्करा के.
मैं तुमको चाय पिलाऊं,
तुम मुझको खाना खिलाना.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा खेल ले थोड़ा-थोड़ा,
ये खेल प्रेम का.
तुम सर्दी कहो तो,
मैं सर्दी कह दूंगा।
भरी दुपहरिया में,
कम्बल ओढ़ के हाँ.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा घर बसा लें,
हम दिल्ली में यहाँ.
रोज तुम्हारी नखरों पे,
सुबहा-शाम हो.
रोज हमारी फरमाइशों,
से सजी रात हो.
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा खेल ले थोड़ा-थोड़ा,
ये खेल प्रेम का.
हर रोज एक नई,
नथुनी मैं तुमको दूंगा.
तुम सज-संवर के,
मुझसे मिलती रहना।
तुम लड़की काश्मीर की,
मैं लड़का बिहार का.
आ जा घर बसा लें,
हम दिल्ली में यहाँ.

परमीत सिंह धुरंधर

मैराडोना मैं, मेडोना तू


रूप-रंग में सोना तू,
अंग-अंग से टोना तू,
आज तो घूँघट खोल दे रानी,
मैराडोना मैं, मेडोना तू.
मैराडोना मैं, मेडोना तू.
मैराडोना मैं, मेडोना तू.
आज की रात लम्बी है,
तन-मन पे छाई मस्ती है.
बस अपने ओठों से पिला दे तू,
क्रिस्टिनो मैं, बिपाशा तू.
क्रिस्टिनो मैं, बिपाशा तू.
क्रिस्टिनो मैं, बिपाशा तू.

परमीत सिंह धुरंधर

This is dedicated to my favorite player Meradona and his love for the game.

नैहर के चोर


गली – गली में शोर बालम जी,
धरती पे एगो चोर बा.
लूट अ ता रोज हमर खजाना,
अइसन उ मुँहजोर बा.
हमरा रहते ये रानी,
केकर तहरा पे जोर बा.
हमरा त लॉग अ ता,
की तहरे मन में कउनौ चोर बा.
चल जा तानी रोजे बथानी,
हमरा के अकेले छोड़ के.
आव अ ता आधी रात के,
दे ता देहिया झकझोड़ हाँ.
गली – गली में शोर बालम जी,
धरती पे एगो चोर बा.
लूट अ ता रोज हमर खजाना,
अइसन उ मुँहजोर बा.
काहे ना चिल्लाइलु तू,
आवाज देहलू बढ़ के.
हमरा त लॉग अ ता रानी,
तहरा भाइल ई चोर बा.
मुँहवा दबले रहल हमार,
अंगिया पे रखले रहल धार हाँ.
चूड़ी तुरलख, कंगन छिनलख,
ले गइल नथुनिया तोड़ हाँ.
गली – गली में शोर बालम जी,
धरती पे एगो चोर बा.
लूट अ ता रोज हमर खजाना,
अइसन उ मुँहजोर बा.
हमरा त लॉग अ ता रानी,
तहरा नैहर के कउनौ जोड़ हाँ.
गली – गली में शोर बालम जी,
धरती पे एगो चोर बा.
लूट अ ता रोज हमर खजाना,
अइसन उ मुँहजोर बा.
हमरा रहते ये रानी,
केकर तहरा पे जोर बा.
हमरा त लॉग अ ता,
की तहरे मन में कउनौ चोर बा.

परमीत सिंह धुरंधर

प्रणय की रात


ग़मों की रातें, हैं छट रहीं.
कोई आ रहा हैं ख़्वाबों में.
दूर तक हैं रौशनी,
बिना चाँद के ही आसमानों में.
हवाएँ भी उठने लगीं,
न जाने क्यों साथ मेरे बहने को.
हर दर्द है मिट रहा,
बिना मेरे फरियादों के.
ग़मों की रातें, हैं छट रहीं.
कोई आ रहा हैं ख़्वाबों में.

परमीत सिंह धुरंधर