A Finite Preference


I want to fall under gravity
the way the apple did—
silent, certain,
obedient to a law it never questioned.

Not to drift like infinity,
endless and unresolved,
stretching beyond measure,
never arriving.

Infinity never grows,
never diminishes—
it only refuses to end.

I would rather be zero:
a point of rest,
a place where motion begins,
where something can be counted,
where change is possible.

Let me fall.
Let me touch ground.

RSD

ये उम्मीदें तुमसे मिलन की


घड़ी -की-घड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.
छोटी -से छोटी होती जा रहीं
ये आसमा और ये जमीन
पर, दूरी – की – दूरी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.

सोचा था की पटना से एक पल बांधूंगा
चलेंगे नंगे पाँव जिसपे हम और तुम.
ये लकीरे लिखी – की -लिखी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.
घड़ी -की-घड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.

अब नहीं है इरादा
नहीं है जूठी ही आशा
टूटी-की-टूटी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.
घड़ी -की-घड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की

मिलता भी कोई तो कैसे?
हमने दिल में बसाया है तुमको
उजड़ी-की-उजड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.
घड़ी -की-घड़ी रह गयी
ये उम्मीदें तुमसे मिलन की.

RSD

पिता के पाँव को


हम उस धरती के वंशज है, जहाँ पिता पुत्र पे मरते हैं -२
हम उस धरती से आते हैं जहाँ पुत्र पिता के लिए लड़ते हैं.
हम उस धरती के वंशज है, जहाँ पिता पुत्र पे मरते हैं -२
हम उस धरती से आते हैं जहाँ पुत्र पिता के लिए लड़ते हैं.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

जब-जब हम थे तुतलाये, चूमा हमारे गाल को
जब -जब लौटे थे जीत के, चूमा हमारे माथ को.
पर जिस दिन था दुनिया को रौंदा, बोले पिता
मेरे माँ को, हे देवी, प्रणाम तुम्हे, नारी तुम महान हो.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

तुमने पिता बनाया मुझको ऐसे हाँ पुत्र का
जो धरा पे रम रहा लिए दम्भ मेरे नाम का
क्षण -क्षण में ह्रदय में मेरे जो आनंद का भण्डार भरें
और पल-पल में सीना मेरा करता है विशाल जो.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

RSD

पिता एव परमसत्यः


पिता एव परमसत्यः,
पिता एव परमेश्वरः।
पिता एव अमृतस्वरूपः,
पिता एव अजरामरः।

पिता एव धर्मग्रन्थः,
पिता एव गीताज्ञानम्।
पिता एव नीलकण्ठः,
पिता एव नारायणः।

पिता एव शाश्वतशान्तिः,
पिता एव कर्ममार्गः।
पिता एव ब्रह्मवाणी,
पिता एव सत्यसारः।

पिता एव प्रथमप्यारः,
पिता एव पथप्रदर्शकः।
पिता एव जीवस्रोतः,
पिता एव मोक्षद्वारः।

पिता एव दीपज्योतिः,
पिता एव दिशां सारः।
पिता एव आदित्यसमानः,
पिता एव अमराधारः।

पिता एव वटवृक्षः,
पिता एव छायावरदानम्।
पिता एव तपस्त्यागः,
पिता एव समर्पणमहान्।

पिता एव आकाशः,
पिता एव भूमेः मानः।
पिता एव गति: शक्तिः,
पिता एव प्राणाधारः।

पिता ही परम-सत्य,
पिता ही परमेश्वर।
पिता ही अमृतस्वरूप,
पिता ही अजर-अमर।

पिता ही धर्म-ग्रन्थ,
पिता ही गीता-ज्ञान।
पिता ही नीलकंठ,
पिता ही नारायण।

पिता ही शाश्वत शांति,
पिता ही कर्ममार्ग।
पिता ही ब्रह्मवाणी,
पिता ही सत्य-सार।

पिता ही पहला प्यार,
पिता ही मार्गदर्शक।
पिता ही जीवन-स्रोत,
पिता ही मोक्ष-द्वार।

पिता ही दीप-ज्योति,
पिता ही दिशाओं का सार।
पिता ही सूर्य समान,
पिता ही अमर आधार।

पिता ही वट-वृक्ष,
पिता ही छाया का वरदान।
पिता ही तप और त्याग,
पिता ही महान समर्पण।

पिता ही आकाश,
पिता ही भूमि का मान।
पिता ही गति और शक्ति,
पिता ही प्राण-आधार।

RSD

Believe


I don’t believe in lies,
Because I believe in your eyes.
No shadow of doubt can hide,
The truth your gaze confides.

Through storms that roar and skies,
Through whispered fears and sighs,
I find my heart’s own prize:
The faith within your eyes.

RSD

शायर वही जो फ़िराक है


शायर वही जो फ़िराक है,
बाक़ी सब तो इश्क़ में बर्बाद हैं,
हमने चाहा जिसे वो आबाद है,
गोद में खिला रही नन्हीं जान हैं।

शहर वही जहाँ उसके पाँव हैं,
बाक़ी सब तो धूल, राख, ख़ाक हैं।
दिल वही जो उसके लिए धड़के,
बाक़ी सब तो बस बेजान हैं।

जिस पल में उसका जिक्र हो,
वही लम्हा मेरा इनाम है.
मेरी हर दुआ में उसका नाम है,
हर ख़ुशी लगती, उसका पैगाम है.

जिसे चाहा वो पराया निकला,
हम उस हसरत की ही मिसाल हैं.
मौत भी शरमा जाए देखकर,
हम ऐसे ख़ामोश सवाल हैं।

RSD

Falling for Her Rise


She likes to rise,
But I like to fall—
Fall into the depths of her lap,
For her bosom, soft as night, cradles me whole.
She rises with strength, defiant and proud,
While I surrender, weightless, to her embrace,
Drawn to the quiet, the calm, the tender unknown.

Where she soars to conquer the skies,
I drift below, into her tides—
Not in defeat, but in reverence,
For the ocean of her being calls me home.
She rises with fire; I fall with grace,
Together, we dance in our perfect space.

For in falling, I do not lose—
I find the diamonds at the meeting of her thighs,
The treasures of love, of touch, of truth.
She rises, and I fall,
Two forces in motion,
Bound to the rhythm of one endless ocean.

RSD


Dream and Plot


To have a dream
You have to be innocent.
Because a mind full of plans
Only makes plots
And never chase a dream.

To win a marathon
You need to compete with yourself.
To compete with someone
You need to make a plan and plot.
But to compete with yourself
You have to chase a dream.

RSD

Treat me like a morning


Treat me as a sky,
Where you want to reach
To have your life.
Treat me as a sky
Where you want to spread your wings
To fly and not just to survive.

Don’t treat me as a delicate flower
Or weather.
Don’t treat me like a night.
Just because you need a nap.
Treat me like a morning.
With this, your day can begin.

RSD