हमसे इश्क़ करने के लिए यूँ दावं -पेंच ना करो
कभी बैठ कर मेरे संग दान-दक्षिणा करो.
जिसकी चाहत में दरिया सुख गयी,
उस दरिया में फिर बदली बरसायेंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
RSD
हमसे इश्क़ करने के लिए यूँ दावं -पेंच ना करो
कभी बैठ कर मेरे संग दान-दक्षिणा करो.
जिसकी चाहत में दरिया सुख गयी,
उस दरिया में फिर बदली बरसायेंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
RSD
जल रही है ज्वाला मन में, जैसे कोई अंगार है
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
प्राणों की वेदी भी प्रभु आप पे निसार है.
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
दीखते नहीं हैं सूक्ष्म कांटें अब तो हाँ इन आँख से
बहरती -सुहारती हूँ पथ को अपने हाथ से.
इस निर्जन कुटिया में प्रभु बस आपकी ही आस है
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
क्या दिन और क्या रात प्रभु, बिन आपके सर्वत्र अन्धकार है
बरसात-गर्मी-बसंत, बिन आपके, सब एक सामान है.
कापंते-जर्जर तन से ये आखिरी गुहार है
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
उड़ जाए ये प्राण पखेरू, उसके पहले प्रभु-चरण पखारूँ
इसके सिवा ना और कुछ भी ह्रदय में बसी चाह है.
इस निर्बल-अबला की लाज, प्रभु आपके ही हाथ है.
बरसों के तपते ह्रदय को प्रभु आपका इन्तजार है.
RSD
प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे
५०० -साल की प्रतीक्षा,
प्रभु आएंगे, और हम निहारेंगे।
बरसों से बंजर ह्रदय पे प्रभु प्रेम की बरसा बरसायेंगे।
प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे।
ये विश्वास अटल लिए मन में हम
बैठे थे बरसों हस अरण्य में हम
प्रण था की आकुल मन और विकलित ह्रदय से
अनंत-अंत तक हम पुकारेंगे।
प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे
५०० -साल की प्रतीक्षा,
प्रभु आएंगे, और हम निहारेंगे।
जीवन और जीवन की धारा,
बिना राम नहीं इनका किनारा
एक राम नाम ही, सबका सहारा
जप-जप कर राम नाम,
प्रभु के पग-पग में हम दीप जलाएंगे।
प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे
५०० -साल की प्रतीक्षा,
प्रभु आएंगे, और हम निहारेंगे।
हिन्द की इस पावन धरा पे
फिर से श्री राम किलकारेंगे, विराजेंगे।
अद्भुत है जीवन की माया
इस माया में मैं बंध गया
मेरे हर बंधन, बेड़ी को प्रभु काटेंगे, पार लगाएंगे।
प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे, प्रभु आएंगे
५०० -साल की प्रतीक्षा,
प्रभु आएंगे, और हम निहारेंगे।
प्रेम प्रुस्कृत नहीं हो सकता
सिंह भयभीत नहीं हो सकता।
तिमिर के शिविर में
एक दीप भी ग्रसित नहीं हो सकता।
माँ, माँ जब तक तुम हो संग मेरे
तुम्हारा राम कभी पराजित नहीं हो सकता।
Rifle Singh Dhurandhar
जिंदगी जहाँ पे दर्द बन जाए
वहीँ से शिव का नाम लीजिये।
अगर कोई न हो संग, राह में तुम्हारे
तो कण-कण से फिर प्यार कीजिये।
राम को मिला था बनवास यहीं पे
तो आप भी कंदराओं में निवास कीजिये।
माना की अँधेरा छाया हुआ हैं
तो दीप से द्वार का श्रृंगार कीजिये।
जिंदगी नहीं है अधूरी कभी भी
तो ना अपहरण, ना बलात्कार कीजिये।
माना की किस्मत में अमृत-तारा नहीं
तो फिर शिव सा ही विषपान कीजिये।
Rifle Singh Dhurandhar
प्रेम है तो प्रेम से -३
हाँ बोलिये
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।
मन को जो बाँध ले, तन को बिसार के
ऐसी छवि कहाँ देखि चारों धाम?
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।
मायापति जो-२, स्वयं संसार के
पिता के प्रेम में भटके गली-गली, गावं।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।
जीवन भर रखा एक पत्नी -व्रत
इससे बड़ी औरत की और क्या चाह?
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।
जिसके ह्रदय में, कैकई -कौशल्या,
लक्ष्मण -विभीषण, हैं सब एक सामान।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।
अपने माता-पिता को मत ताड़िये
वरना छलकेंगें आंसू आँखों से हर एक रात.
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।
एक ही जीवन है सबका
प्रेम में ना तोड़िये कभी विश्वास।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।
संघर्ष से ही बदलता है मानव-जीवन में
हर अंत और परिणाम।
जय सियाराम, जय -जय सियाराम
जय सियाराम, जय -जय सियाराम।
Dedicated to the #RamJanam #BhoomiPujan for #RamMandir in #Ayodhya.
परमीत सिंह धुरंधर
जब – जब नारी पात्र बनी है, हंसी, भोग, बिलास का
श्री हरी अवतरित हुए हैं लेकर नाम कृष्णा – राम का.
पूरी महाभारत रच दिया था, रखने को एक नारी की लाज
कैसे तुम नाम दोगे उसे नारी के अभिशाप का?
ज्ञान पे तुम्हारे लग रहा, अब अभिमान है छा रहा
वाणी ऐसी ही होती है, जिसके मन – मस्तक में हो पाप छिपा।
अभिमानी को कब हुआ है श्री हरी का आभास भी
ऐसे ही जन्म होते हैं कुल-काल-कोख पे दाग सा.
परमीत सिंह धुरंधर
मैं बुलंद हूँ, और बुलंदी मेरी आपके नाम से मेरे प्रभु
मैं भक्त हूँ, और मेरी भक्ति आपके चरणों से मेरे प्रभु।
स्वयं शिव भी लगावे ध्यान जिसका
रुद्रावतार लेकर करे बखान जिसका
टूट जाए माया की हर जंजीर, एक तेरे नाम पे प्रभु
भवसागर में सहारा बस एक तेरा ही, मेरे श्रीराम प्रभु।
Dedicate to the Shri Ram Mandir construction.
परमीत सिंह धुरंधर
जब श्रीराम को आना होगा
श्रीराम आयेंगे।
अत्याचारी से कह दो
संग हनुमान जी भी आयेंगे।
जब मंदिर बनना होगा
मंदिर बन जाएगा।
जन – जन के ह्रदय में हैं श्रीराम
ह्रदय से कैसे मिटाओगे?
इस माटी का रंग उनसे
इस माटी की खुशबु हैं श्रीराम।
मीठी हो जाती है धुप भी
अगर लिख दें
हम आँगन में श्रीराम।
घर – घर में बसे हैं
हनुमान-ध्वज में श्रीराम
घर – घर से कैसे मिटाओगे?
परमीत सिंह धुरंधर
नदिया हमसे
ये सवाल पूछती है.
किसके पाँव पखारूँ?
वो नाम पूछती है.
पत्थर बन गया
एक सुन्दर सी नारी
फिर क्यों भारत की लड़कियाँ
Fair & Lovley ढूंढती हैं?
यहाँ पत्थर पे भी
तुलसी चढ़ती है.
फिर क्यों भारत की लड़कियाँ
Fair & Lovley ढूंढती हैं?
परमीत सिंह धुरंधर