मैं तन्हा हूँ तन्हा तुम्हारे लिए
मुझसे मेरी तन्खा ना पूछ।
मेरे नसों में है साँगा का ख़ून
मेरे दर्द की दवा ना ढूंढ।
मैं सुलगता रहा तेरी चाहत में
अब बुझने की वज़ह मत पूछ।
तेरी यादें हैं धुएँ की मानिंद,
इनमें मेरा वजूद मत ढूंढ।
हर मोड़ पे तेरी ही चर्चा रही,
कहाँ छूटे थे—अब मत पूछ।
मैं छुपा बैठा हूँ अपने आप में,
इस दिल की धड़कन मत सूंघ।
अगर जान सको तो जान लो मुझे,
हर बात की सफ़ाई मत पुछ।
मैं बिखरा हूँ उस नाम के साथ,
जिसे अब तू भी नहीं ढूंढ।
RSD