जवानी


आग लगा दो पर्वत में अगर छाई तुमपे जवानी है
ना मिली उनकी जुल्फ तो क्या, अपनी भी एक कहानी है.
टुटो, टुटो तुम बार बार ऐसे, की चोट हर बार तुम्ही पे हो
अधरों पे वो प्यास बसा लो, जहाँ हर दरिया सूख जानी है.

The image was taken from google search from the link https://www.mcgill.ca/newsroom/channels/news/mountain-fires-burning-higher-unprecedented-rates-331540

RSD

छपरा


खुदा तेरी चाहत का ये कैसा मिसरा है
लिखता हूँ तेरा नाम और लिख जाता छपरा है.
किस दर पे तेरे आऊं सजदा करने को
तेरे दर की कोई भी राह लूँ, वो ले जाती बस छपरा है.

RSD


उमड़े बादल वो जो बरसने को तैयार हों तो हम भी खेतो में अपने बीज डाल दें
कुछ पैसे आ जाएँ मेरे खातों में तो हम भी शहर से गावँ की तरह मुड़ लें.

RSD


मैं अपनी ही उम्मीदों पे खड़ा नहीं उतरा और वो मुझसे उम्मीद लगाए बैठे हैं.
दिल काटे भी तो कैसे रात को, वो हर रात किसी के मेहमान बने बैठे हैं.

RSD


इतनी तमन्ना क्यों करता है खुदा मेरी मुश्किलों का
कोई राह बची भी नहीं अब एक तेरे दर के सिवा।।

RSD


कितना बदल गया है इंसान, जैसे हर मोड़ पे एक पुतला है
मिलता है मेरा दिलबर अब ऐसे, जैसे अभी, यही पे मिला है.

RSD


गाँवों के शहजादे शहरों में गुमनाम से हैं
पैसों की इतनी चाहत की इंसान अब बस साजो-सामान से है.

RSD

वक्षों पे चोली कस रही हैं


बहुत मुश्किलों में हैं मेरा, जिंदगी हर मोड़ पे छल कर रही है
प्यास मेरी है की मिटती नहीं, और वो अपने वक्षों पे चोली कस रही हैं.
मुझे यूँ ही बहका के हर बार वो पीछे हट जाती हैं
मेरी मोहब्बत, मेरी प्यास सबको वो वासना कह रही हैं.

RSD

मोहब्बत


किसी को भी यकीं नहीं उनसे मेरी मोहब्बत का
ज़माना देखता है चेहरा, नहीं दिल मेरा, ऐसा ही है हुस्न उनका।

RSD

बसेरा


जुल्फों में जिनके कभी मुक्कमल था जहाँ मेरा
मेरे ही सिवा एक वो बन गया है सबका बसेरा।

RSD