मौसम के बदल जाने से बदल जाते हो तुम
तुम्हारी सोहबत में नहीं लेकिन बदले हम.
इंसानों की बस्ती में कई इंसान भी ऐसे हैं
जिन्हे कहते भी नहीं हैं कभी इंसान हम.
इरादा ही रखते थे तन्हा होने का हम
उनको कहते ही नहीं हैं कभी बेवफा हम.
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मौसम के बदल जाने से बदल जाते हो तुम
तुम्हारी सोहबत में नहीं लेकिन बदले हम.
इंसानों की बस्ती में कई इंसान भी ऐसे हैं
जिन्हे कहते भी नहीं हैं कभी इंसान हम.
इरादा ही रखते थे तन्हा होने का हम
उनको कहते ही नहीं हैं कभी बेवफा हम.
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कहाँ बैठे हो हमसे दूर जाकर
आवो कोई ख्वाब बुने, बाहों को उलझाकर।
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तुम मेरे लिए क्या हो तुम्हे मालुम नहीं
और मैं तुम्हे बता दूँ, रहा अब वो वक्त नहीं।
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उनके मिलने के पहले घनी रात थी
उनके जाने के बाद एक चिराग है.
तेरी महफ़िल में तेरा इंतज़ार कर रहें हैं
कैसी जुदाई है खुद को ही इल्जाम दे रहें हैं.
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भीड़ में भी तन्हाई का सफर होता हैं
बिना मिले जिस्म के भी मिलन होता है.
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किसी न किसी की मोहब्बत में सभी बेताब हैं
जिंदगी किसी की ऐसी नहीं जो इस दर्द से अनजान है.
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कौन है तेरी महफ़िल में जो तुझसे जुदाई चाहता है
हर शख्श तेरे आगोश में ही रुख्शते-जिंदगी चाहता है.
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किसी ने दाग से पूछा इश्क़ में दर्द को कैसे पालते हैं
दाग ने कहा, आवो, चलो Crassa से मिलते हैं.
हुश्न और इश्क़ पे तो सबने लिखा है, मीर से ग़ालिब तक
मगर आज के दौर में वो कलम हम रखते हैं.
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तुम शहर की सबसे चालक अप्सरा हो
दिल चाहता है की तुम्हारा ससुराल बस छपरा हो.
मेरी किस्मत न सही, किसी की तो किस्मत में हो
दिल चाहता है की तुम्हारे करीब कोई अपना हो.
मुश्किल नहीं है रात में दर्द को दबाना
बस दिन में एक बार तेरा दिख जाना हो.
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