ऐसी चोट खाई है


मौसम सा हैं वो या मौसम भी उसका मासूक है
कमर पे बादल और केशुवों में हवा महफूज हैं.
रुत बदले भी तो कैसे बिना तेरी अंगराई के
तेरी आँखों में सागर और कमर पे पुरवाई है.
उसका बांधना जुल्फ को यूँ फूलों से
क्या किसी ने कभी ऐसी चोट खाई है.
उड़ती हैं तितलियाँ जिसके दीदार पे
हमने तो उसकी एक ही नजर में होश गवाई है.
टूटे भी इश्क़ में तो गम नहीं,
मीठी मिलन के बाद ही दर्दे-जुदाई है.

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सुकून


ये तो आगाज है और बेदम कर रहे हैं
वो थोड़ा बाहों में लेले तो सुकून से दम निकले।

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मोहब्बत


इस जिंदगी में कोई गुनाह कर ही नहीं पाए
इस कदर मोहब्बत किये बैठे थें.
वो आई, मिली, मुस्कराई और चली गयी
हम पहली ही नजर में सब कुछ लुटाये बैठे थे.

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नजर


जो वक्त को थाम ले वो नजर हैं उनकी
जो बच निकले हैं इनसे, कभी देखि हैं हालत उनकी।

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दिल को जलाकर


दिल को जलाकर पिए जा रहे हैं
बचा अब ना कुछ भी, पर जिए जा रहे हैं.
किसको पुकारे, कौन है यहाँ अपना
मुख को हाँ मोड़ें हाँ सभी जा रहे हैं.

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इसी कश्मकश में रहा


उलझने सुलझाऊँ या जिंदगी बसाऊं, इसी कश्मकश में रहा.
उनको मनाऊं या खुद से ही रूठ जाऊं, इसी कश्मकश में रहा.
हालत कुछ यूँ बदल गए, की खुद को बदलूँ या हालात बदलूँ, इसी कश्मकश में रहा.

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पतवार


फैसला ना करो कभी खुदा के डर से, दी हैं जिंदगी को तो एतबार रहो
डूबने नहीं देगा वो कश्तियाँ तुम्हारी, मगर तुम भी तो हाथ में पतवार रखो.

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मेरी कोशिश


आसान बन जाती है जिंदगी तेरे मुस्कुराने से
और मेरी कोशिश है की तू मुस्कराये।
पर बहुत काँटे हैं मेरी दामन में
और डर है की एक भी तुम्हे न लग जाए.

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टुटा और टूट कर बिखर गया


इशारों-इशारों में उसने बता दिया
कुछ भी नहीं मिला उससे घर बसाकर।
मैं टुटा और टूट कर बिखर गया
वो भी तन्हा रही सेज को सजाकर।

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ना मिलो


ना मिलो, ना मिलो, ना मिलो फिर से आजमाने के लिए
हम तेरी सोहबत में थे, खुद को मिटाने के लिए.

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