औरत कितना भी शोर मचा ले,
कोई नहीं सुनता.
लेकिन, जब माँ को गुस्सा आता है तो,
कैसा भी बाप हो वो शांत हो जाता है.
परमीत सिंह धुरंधर
औरत कितना भी शोर मचा ले,
कोई नहीं सुनता.
लेकिन, जब माँ को गुस्सा आता है तो,
कैसा भी बाप हो वो शांत हो जाता है.
परमीत सिंह धुरंधर
घरौंदें,
मिटटी के.
बनते ही हैं,
टूटने के लिए।
मगर इन्हे,
घर बंनाने के लिए।
आखिरी साँसों तक,
हम लड़ेंगे।
वो निकलें हैं,
बैठ के हाथी पे।
अपने मद में,
मतवाले।
हम नंगे पाँव ही,
ज़मीन पे खड़े होकर,
उनका सामना करेंगे।
कहता रहे जमाना,
हमें नादान,
नासमझ, नालायक।
हम अपनी,
अनुभवहीनता के बावजूद।
ये जंगे-जीत,
हासिल करेंगें।
परमीत सिंह धुरंधर
ग़मों से सजी जिंदगी,
खुशहाल हैं.
अगर ये साँसें,
मेरी आज़ाद हैं.
क्या होगा,
वैसी ख़ुशी का.
जिसमे आँखे झुकीं,
और तन पे,
सोना-चांदी का,
चमकता लिबास है.
भूख से बिलखती रातें,
खुशहाल हैं.
अगर हर सुबहा पे,
मेरा इख्तियार है.
क्या होगा उन ख़्वाबों को,
देखकर,
जिसपे किसी के हुक़्म का,
पाबन्द है.
ग़मों से सजी जिंदगी,
खुशहाल हैं.
अगर ये साँसें,
मेरी आज़ाद हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
नए जवाहरलाल हैं,
अपने केजरीवाल।
सबको निकाल बहार करेंगे,
खुद करेंगे राज.
मुफ्त मिलेगा खाना सबको,
मुफ्त मिलेगा आनाज,
लेना है अगर सब मुफ्त तो,
फिर मत पूछो सवाल।
बोतल नयी है पर,
उसमे वो ही पुरानी है शराब।
तुम लो बस तीन आना,
और हम लगाएं गुलाब।
नए जवाहरलाल हैं,
अपने केजरीवाल।
सबको निकाल बहार करेंगे,
खुद करेंगे राज.
अन्ना को छोड़ा, भूषण को तोडा,
योगेन्द्र यादव को दी है लात.
आज भी नहीं सुधरेंगे तो,
कल ये भी हो जाएंगे श्यामा प्रसाद।
नए जवाहरलाल हैं,
अपने केजरीवाल।
सबको निकाल बहार करेंगे,
खुद करेंगे राज.
परमीत सिंह धुरंधर
There is no use in celebrating “Women’s Day” until and unless:
Kareena Kappor understands the pain of Amrita Singh,
Hema Malini understands the pain of Prakash Kaur,
Rekha understands the pain of Jaya Bhaduri,
Soniya Gandhi understands the pain of Menka Gandhi,
Sridevi understands the pain of Mona Kapoor,
Kiran Rao understands the pain of Reena Dutt,
Lara Dutta understands the pain of Shveta Jaishankar,
Sarika understands the pain of Vani Ganapathy,
Gouthami Tadimalla understands the pain of Sarika,
and ……
Until and unless an Indian woman understands the pain of another woman, just tagging a photo or writing about “Women’s Day” and women power is meaningless.
Parmit Singh Dhurandhar
विद्रोहियों की कोई जात नहीं होती,
इनकी कोई विसात भी नहीं होती।
पर बैठ नहीं सकते ये चैन से,
किसी भी परिस्थिति में,
इनको चैन नहीं मिलती।
अगर रोकना हैं इनको,
तो आप इनको मोहब्बत करा दो.
क्यों की वहीँ,
इनसे कोई विद्रोह नहीं होती।
उलझ के रह जाते हैं,
अपने ही दिल-दिमाग के जाल में.
भूख के खिलाफ लड़ने वाले,
विद्रोही की प्रेम में कोई औकात नहीं होती।
सिर्फ पुष्पों, सिद्धांतों, और नारी-सम्मान पे बोल के,
भारतीय नारियों का दिल नहीं जीता जा सकता।
और इनके जेब से,
सोने-चांदी के तोहफे खरीदी नहीं जाती।
तभी तो कोई स्त्री, किसी विद्रोही से प्रेम नहीं करती।
आवाज धीरे -धीरे कम हो जाती है,
घुट-घुट कर वो खुद से ही,
हतास-निराश हो जाती हैं.
और फिर एक दिन,
किसी अनजान से मोड़ पे,
विद्रोही के प्राण ही विद्रोह कर देते हैं.
लावारिस, अंजाना,
ना कोई देखने वाला, ना पहचानेवाला,
और अंत में इस तरह, एक विद्रोही की आवाज,
अनंत में सम्मिलित हो जाता है,
उदासी और हार के आवरण में ढक कर.
और समाज फिर चल पड़ता है,
उस विद्रोही की भुला कर.
और वो नाचने लगती हैं,
रईसो के दरबार में.
जिन बेड़ियों को तोड़ने के लिए,
जीवन भर विद्रोही ने विद्रोह किया।
उन्ही को अपने गोरे और नाजुक पावों में,
घुंघरू बना कर.
परमीत सिंह धुरंधर
किसी भी हालात से डरना नहीं है,
मौत भी समक्ष हो,
तो हटना नहीं है.
चंद साँसों के लिए,
क्या समझौता करें हम,
अँधेरी राहों में भी हमें रुकना नहीं है.
तुझको मुबारक हो ए साथी,
ये गुलिस्तां,
तेरे बाहों के लिए हमें पलटना नहीं है.
धरती पे आएं हैं तो दलें जाएंगे,
या दल के जाएंगे,
भय से बंध के हमें सिकुरना नहीं है.
कुछ भी मिले या न मिले हमको,
पर अमीरों की बस्ती में,
गरीब बनके रहना नहीं है.
परमीत सिंह धुरंधर
Recently, there was allegation on AAP by AVAM for converting black money into white by accepting donation from fake companies. Instead of accepting their gaffe, AAP came with a logic and raised question about timing of allegation. In an interview with Bharkha Dutt, Mr. Arvind Kejriwaal told “मैंने तो बरखा से पैसा लिया। अब बरखा कहाँ से पैसा लायी, ये जाने का काम मेरा नहीं सरकार का हैं. वो पकड़े अगर आपने गलत किया है”. So the whole episode showed that his honesty (also the honesty of his associates) is indubitable and unalterable. It is similar to ex (the Euler’s number) as differentiation of ex is ex and it does not change upon the degree of differentiation. For example: d (ex)/dx = ex. The d (d(ex)/dx/dx which is d2(ex)/dx2, and so on. This term ‘e’ (natural logarithm) was defined by eminent mathematician Euler. Anna is like Euler, he created such an honest man like AK that nothing can affect his honesty, even his corruption. Instead of commenting on the AK’s fault, Anna wrote a blog about failure of Modi’s government. What will AK tell this timing? The hidden meanings of his explanation are following:
Parmit Singh Dhurandhar
रिश्ते जो,
गुनाहों की चादर में लिपटे हुए हैं,
अंधेरों में भी पर्दा रखते हैं.
आँखों में, हया-शर्म,
कुछ भी नहीं है उनके,
फिर भी जमाने से घूँघट रखते हैं.
कौन कहता है की,
शातिर होतें हैं कातिल,
अरे इस बस्ती से तो,
एक -दो ही केजरीवाल बनते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
बिषय ही ऐसा था,
विवाद हो गया,
सारे शहर में खुले – आम,
बवाल हो गया.
दुकानें हो गयी बंद,
और,
लोग घरों में छुप गए,
गली-गली में ऐसे,
कोहराम मच गया.
छा गए थे जो बादल,
बरसने को उमड़-उमड़ के,
वो भी छट गए,
और,
सूरज फिर से प्रखर हो गया.
देखो, कैसे अब,
आसमां का रंग बदल गया.
अमीर के घरों पे आ गए हैं तारे,
और गरीब,
जला-जला कर दिया,
हर रात गरीब हो रहा.
भूख से बिलखती एक भीड़ देखी,
जिसे, एक नेता,
आज अमीर बनने का सपना दे गया.
भैंसो पे बैठे, हँसते बच्चे,
आज उनको कोई हाथों में मोबाइल दे गया.
की शहर से फैला ये रोग,
आज गावँ-गावँ में आ गया.
परमीत सिंह धुरंधर