मोहब्बत में रोने वाला,
इबादत में बैठा है.
देखो,
खुदा भी तनाव में आ गया है.
जाने क्या, मांग दे.
सितम की बाजियां खेलने वालों,
कभी अपनी आँखों के दहशत को पढ़ों.
जाने कौन सी बाजी,
तुम्हारी किस्मत को छल दे.
किसी का दिल तोड़ कर,
डोली चढ़ना तो आसान है.
डोली छोड़ कर कोई दिल जोड़ दे,
ऐसा भी तो कोई दिखे.
परमीत सिंह धुरंधर