दीप जला के


धुप में बैठा हूँ दीप जला के
यही मेरे इश्क़ की कहानी है.
हो गए उसके, अब तो चार-चार बच्चे
फिर भी मुझको वो लगती कुवारी है.

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दम्भ है वीरों का


टूट कर भी तारे अम्बर के जमीन पे आते नहीं
ये ही दम्भ है वीरों का, वो हार से शर्माते नहीं।

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राजपुताना


रंगी है जमीन अपने लहू से कई बार
तब जानता है राजपुताना को संसार।

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नज़र तुमपे ही है


मेरी नज़र तुमपे ही है सनम
तुम हो कि, तुम्हें ही ना कोई खबर
तुम पढ़ती हो दुनिया भर की किताबें
बस मेरी ही किताबों पे नहीं तुम्हारी नज़र।

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गजब की धुप


गजब की धुप में निखरा तेरा रूप
या निखरे तेरे रूप पे गिरती गजब की धुप
तेरी मुस्कान एक कातिल सी
या कातिल है तेरा मुस्कुराना खूब.

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फिर से इश्क़ किया


इतना सा दिल था, जा तोड़ दिया
तुझे भुला कर, फिर से इश्क़ किया।
कभी चाहा था तुझे, दुनिया भुला कर
तुझे भुला कर, अब फिर से इश्क़ किया।

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मेरी कहानी


तू आज तड़पाने में मसरूफ़ है,
कल तेरी तड़प मेरी कहानी होगी।

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गुस्ताखियाँ


संभाल के रख अपनी अदा,
हुनर को
मैं भी जी रहा हूँ, कमा रहा हूँ
सिर्फ करने को इनसे
हर रात गुस्ताखियाँ।

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तपते ही रह जाए


टूटे तारे लौट के फिर अम्बर पे कभी आए ना
हम भी घमंड में ऐसे, बस तपते ही रह जाए हाँ.

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रात


जो गुजरी है शाम, काश वो रात बन जाती
जी लेते तनहा ताउम्र जो वो एक मुलाकात बन जाती।

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