सम्पूर्णता


जवानी के ढल जाने का और कहानी के मिट जाने का असर तभी है, जब वो अपूर्ण हो. सम्पूर्णता तो भगवान में भी नहीं, फिर मनुष्य का ये एहसास ही एक छलावा है.

परमीत सिंह धुरंधर

इंतज़ार


इंतज़ार अगर सोच है तो परिणाम के सुखद होने की संभावना है, मगर इंतज़ार अगर लाचारी और मज़बूरी है तो फिर परिणाम ग्रहों का खेल है.

परमीत सिंह धुरंधर

दिया


दिया जलाने के लिए उसकी लौ को हाथो से ढकना होता है और दुनिया से अलग करना होता है.

परमीत सिंह धुरंधर

सर्द-रात


दो रात बाहों में आये,
दो पल मुस्करा के.
दो जिंदगियां तबाह कर गए,
दो सर्द-रात संग में गुजार के.

परमीत सिंह धुरंधर

चाल


जिसकी एक चाल पे दुनिया मिट गयी,
जाने कैसे हमने अपनी साँसों को संभाला है.

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


अब मोहब्बत में क्या पाक रहा दोस्तों,
जब इसमें भी पैसो का हिसाब होता है.

परमीत सिंह धुरंधर

चाँद


चाँद के दाग के कौन देखता हैं,
हर नजर यहाँ सितारों के टूटने पे लगी है.

परमीत सिंह धुरंधर

प्यास


यूँ न रूठो तुम की जिनगी मौत सी लगे,
डूबकर आँसूओं में एक प्यास होंठो पे जगे.

परमीत सिंह धुरंधर

हया


नजरे मिलानी ही है तुझे तो फिर ये पर्दा न कर,
और बाँध रखा है अगर हया ने तो मुझे यूँ बुलाया न कर.

परमीत सिंह धुरंधर

सबेरा


रौशनी वो ही की फिर अँधेरा ना हो,
और चुम मुझे ऐसे की फिर सबेरा ना हो.

परमीत सिंह धुरंधर