अब कहाँ चलती है गोलियाँ मोहब्बत में,
हमें तो शौक है अब उनकी गालियों का.
परमीत सिंह धुरंधर
अब कहाँ चलती है गोलियाँ मोहब्बत में,
हमें तो शौक है अब उनकी गालियों का.
परमीत सिंह धुरंधर
आज की नारी को बच्चों से ज्यादा सुन्दर जिस्म की चाहत है,
और उनके बच्चों को सेरेलेक्स -फारेक्स से राहत है.
परमीत सिंह धुरंधर
वो कहते हैं की आमिर का फोटो बल्गर नहीं,
जो खुद किरण राव को बुर्क़े में रखते हैं.
हमें क्या अब सैफ समझायेंगे की मोहब्बत क्या है,
जो मोहब्बत की शुरुआत भी तालाक से करते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
टूटने पे, शहंशाह के, ताज बन जाते हैं,
ये तो इंसान हैं जो आंसुओं में बहा देते हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
जिंदगी एक दुकान है, जहाँ कुछ भी मेरा नहीं.
हुस्न ने आज हमें आँखों से नहीं, ओठों से नहीं, शब्दों से पिलाया है,
जब उसने धुरंधर सिंह को “मनीष मल्होत्रा” कह कर बुलाया है.
मिलता नहीं है कोई इस बाजरे-किस्मत में मंजिल तक साथ देने को,
मगर राहे-सफर में किसी ने आज हमें क्या जामे-मोहब्बत पिलाया है.
दिल तोड़ के मेरा तुम मुस्कराने लगे,
मोहब्बत क्या है ये बताने लगे.
आँखों से जो दुनिया दिखाई थी मुझे,
ओठों तक आते-आते जुठ्लाने लगे.
कौन कहता ही की होली रंगों का खेल है,
अगर तेरे दर्द पे, मचल जाये जमाना,
तो समझ ए दिल, तू दीवाना है दीवाना, परमित.
हुस्न वो चीज हैं परमित,
जिसने कई घर लूटे हैं,
सिर्फ एक घर बसाने के लिए…..Crassa