ए हुजूर,
आप जिस डाली पे बैठें हैं
वो मेरे वृक्ष पे है.
और कुल्हाड़ी
आपकी आलमारी में है.
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ए हुजूर,
आप जिस डाली पे बैठें हैं
वो मेरे वृक्ष पे है.
और कुल्हाड़ी
आपकी आलमारी में है.
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The beauties of the whole world can not make the fragrance of my dust and the rains of my soil.
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मन के विस्तार में ना खुद को बाँध
मन को बाँध कर खुद का कर विस्तार.
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मिला ना मुझको दर्द का वो हिस्सा जिंदगी
ग़ालिब ने लिखी बैठ के जिसे सारी जिंदगी।
बहुत दिनों की अय्यासी ने बस एक खालीपन दिया
चार दीवारों के बीच तन्हाई और भीड़ में अकेलापन दिया।
वक्त रहते संभाल न सका मैं अपने पावों को
तो गुजरते वक्त ने बस एक सूनापन दिया।
खवाबों तक ही रह गयीं आपके लिए मेरी प्यास
निगाहें मिली, बरसात भी हुई, पर मिट ना सकी ये आग.
जा तुझे छोड़ रहा हूँ तेरी ही ख़ुशी के लिए
तू किसी की भी बाहों में झूले, पर ना मिलेगी मेरी बाहों की मिठास।
वो अपनी मोहब्बत के तारे गिन रहे हैं
और हम शहर में उनके सहारे जी रहें हैं.
भंवर-भाँवर में पंवर -पंवर के
चंवर – चाँवर में चहल -चहल के
देख लेहनी, मिलल ना कोई तहरा जइसन
चुम्बक लागल बा जेकरा कमर में.
नहर -नाहर में छान-छुन के
पोखर -पखार के लांघ-लूंग के
देख लेहनी, मिलल ना कोई तहरा जइसन
चुम्बक लागल बा जेकरा कमर में.
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मेरी गालियां मिले उनकी गलियों से
रब ऐसी कोई दुनिया रच.
उनकी शाम ढले मेरे आँगन में
रब ऐसी कोई दुनिया रच.
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एक बार जो तू चल दे मिला के ये कदम
लौट आएं सारी खुशियाँ जो मुझसे रूठ गई हैं.
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चाहता हूँ गुजर जाऊं तुम्हारे इतने करीब से
फिर न कोई हो तुम्हारे करीब में.
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I am not alone
I am just with my soul.
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फ़िज़ाओं में रौशनी सितारों से नहीं, दुआओं से है
मेरी राहें-मंजिल मेरी माँ की निगाहों में है.
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दरिया और समंदर में, समंदर गहरा है
तेरे हिज़्र का जख्म, हर जख्म से गहरा है.
जझुकि तेरी नजर, तेरे शर्म का पर्दा है
पर इनसे चलें तीरों का जख्म बहुत गहरा है.
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