तुम मेरे लिए क्या हो तुम्हे मालुम नहीं
और मैं तुम्हे बता दूँ, रहा अब वो वक्त नहीं।
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तुम मेरे लिए क्या हो तुम्हे मालुम नहीं
और मैं तुम्हे बता दूँ, रहा अब वो वक्त नहीं।
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उनके मिलने के पहले घनी रात थी
उनके जाने के बाद एक चिराग है.
तेरी महफ़िल में तेरा इंतज़ार कर रहें हैं
कैसी जुदाई है खुद को ही इल्जाम दे रहें हैं.
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भीड़ में भी तन्हाई का सफर होता हैं
बिना मिले जिस्म के भी मिलन होता है.
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किसी न किसी की मोहब्बत में सभी बेताब हैं
जिंदगी किसी की ऐसी नहीं जो इस दर्द से अनजान है.
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कौन है तेरी महफ़िल में जो तुझसे जुदाई चाहता है
हर शख्श तेरे आगोश में ही रुख्शते-जिंदगी चाहता है.
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ये तो आगाज है और बेदम कर रहे हैं
वो थोड़ा बाहों में लेले तो सुकून से दम निकले।
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जो वक्त को थाम ले वो नजर हैं उनकी
जो बच निकले हैं इनसे, कभी देखि हैं हालत उनकी।
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दिल को जलाकर पिए जा रहे हैं
बचा अब ना कुछ भी, पर जिए जा रहे हैं.
किसको पुकारे, कौन है यहाँ अपना
मुख को हाँ मोड़ें हाँ सभी जा रहे हैं.
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फैसला ना करो कभी खुदा के डर से, दी हैं जिंदगी को तो एतबार रहो
डूबने नहीं देगा वो कश्तियाँ तुम्हारी, मगर तुम भी तो हाथ में पतवार रखो.
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