ना मिलो


ना मिलो, ना मिलो, ना मिलो फिर से आजमाने के लिए
हम तेरी सोहबत में थे, खुद को मिटाने के लिए.

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नजर


जो नहीं मेरे, वो तुम्हारे इस कदर
की रह-रह कर नजर जाए उधर.

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मुस्करा रहा हूँ मैं


अपनी बर्बादियों पे मुस्करा रहा हूँ मैं
और जमाना कहता है, कुछ छुपा रहा हूँ मैं.

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जिंदगी


ए ग़ालिब बता कैसे काटे हम ये जिंदगी?
अधरों पे प्यास, मयखाना पास और जेब तंग हैं.

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हसीं औरत


कोई भी नहीं संभल पाता, शोहरत और दौलत को
और तुम दावा करते हो सँभालने का एक हसीं औरत को.

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चाय ही पिला दिया करो


मोहब्बत ना सही, रोज हमसे मिल ही लिया करो
अधरों के जाम न सही, हाथों से चाय ही पिला दिया करो.

हम उफ़ तक ना करेंगे, तुम जिसे चाहो अपना बना लो
बस मेरे नाम का एक खत लिख दिया करो.

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मोहब्बत


मोहब्बत में किसी को कुछ भी हासिल नहीं है.
इस समंदर का कोई साहिल नहीं है।

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मंजर


गरीबी और आशिकी ने वो मंजर दिखा दिया
जन्नत सी दुनिया में जहन्नुम दिखा दिया।

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ख्वाब


जो शाम गुजर गयी मुझे उसका इंतज़ार नहीं
जो शाम आने वाली है मुझे उसका भी ख्वाब नहीं।
क्यों की मेरी तन्हाइयों का कोई आदि नहीं
कोई अंत नहीं।

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रूह


तुम मिलो तो तुम्हे अपनी रूह दे दें
और तुम डर रही हो की तुम्हारा जिस्म ना ले लें.

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