लाल चोली


हमर बलमुआ चोर ह, चोरी करे रात में
आ डाल दे ला डाका, देखे चोली जे लाल रे.

परमीत सिंह धुरंधर

फासला


रौशनी की इतनी भी ना कर चाहते
की अँधेरे में एक फासला सा लगे.

परमीत सिंह धुरंधर

खामोश


शहर बहुत खामोश है
रक्त का बहाव कमजोर है.

परमीत सिंह धुरंधर

आस


आज अभी इस रात को तुझे पाने की चाह है
जानता हूँ ये मुमकिन नहीं पर दिल को एक आस है.

परमीत सिंह धुरंधर

गुनाहों का समंदर


जो दफ्तर में मेरे ना हुए
वो बिस्तर पे मेरे हो गए
ये गुनाहों का कैसा समंदर है?
दोस्त, दुश्मन और दुश्मन, दोस्त हो गए.

परमीत सिंह धुरंधर

हाले-दिल


जो मेरे दिल के टुकड़े -टुकड़े
तेरे नयनों से हुए.
किन राहों में थाम के तुमको
बतलाऊँ हाले-दिल प्रिये।

परमीत सिंह धुरंधर

मैं लौटूँगा


तू न मिली इस जीवन में, अगले जीवन का क्या पता?
दर्द बहुत है, पर प्रिये तुझे पाने के लिए, मैं लौटूँगा।

परमीत सिंह धुरंधर

शिकार


दिल जब भी शिकार पे निकला
शिकार हो गया.
उसने ऐसे नजर ही रखी
दिल लाचार हो गया.

परमीत सिंह धुरंधर

जाम


मासूम बन कर जिसने दिल धड़काया,
कास साकी बनकर एक जाम चखा दे.

परमीत सिंह धुरंधर

कर्म


वक्त के बदलने से इंसान बदल सकता है
पर कर्म के बदलने से भगवान बदल सकता है.

परमीत सिंह धुरंधर