बिजली बना दी


अंगों-ने-अंगों से टकरा के बिजली बना दी
कम्बख्त फिर जलने से कौन बचता?
सबने कहा की परमित ना जा उसके पास
मगर राजपूत रण से पीछे कैसे हटता?

जवानी है, जवानी है, जवानी है-२
तभी तो निगाहों में कहानी है.
कोई बंद कमरे में सुलग रहा
कोई बहती दरिया का पानी है.

वक्त के भीड़ में तुम्ही बगल गए
हम तब भी, अब भी अकेले हैं.

तेरी आँखे ऐसी, की तनहा शराब हो गयी
तेरे जिस्म पे रेंग के हवा मेरे गावं की
जो मीठी थी, अब आग हो गयी
तू क्या खुद को संभाल रही है और किसके लिए
बिहार में चर्चा है की तू अब जवान हो गयी.

RSD

तेरे इश्क़ में


मैं बहुत प्यासा, रह गया तेरे इश्क़ में
बन के एक, तमाशा रह गया तेरे इश्क़ में.
दुनिया सुकून से जी रही है घर बसा के
मैं बंजारा रह गया तेरे इश्क़ में.
चाँद लकीरों की बात नहीं है मोहब्बत
सिक्कों का खेल है
जिसने भी उछाला, ले गया तुझे
करता मैं सजदा रह गया तेरे इश्क़ में.
खुदा इतना कठोर है मुझे नहीं पता था
अपनी तरफ उसे समझता रह गया तेरे इश्क़ में.

किस-किस ने ना लुटा एक तेरे लूटने के बाद
मैं बूत सा देखता रह गया तेरे इश्क़ में.

RSD


अरे सांइयाँ मोरी बहिंया ऐसे ना मरोरो
अरे खेल लो अंगिया से, न जान तो यूँ मारो।
अंग-से-अंग लगा के भी ना चैन हैं तुम्हे
पी लो रस सारा पर गागर तो ना फोड़ो।

RSD


जब भी मिलोगी तुम्हे जला के रख दूंगा
बारूद बिछा के दिल में सुलगा के रख दिया है.
जिसको भी हरा नहीं पाया मैं दिन के उजालों में
उसे रात के अंधेरों में काट के रख दिया है.
दिल की दुनिया में सिर्फ तेरा ही है साया
मैंने सरहदों को इस कदर बाँध दिया है.
ग़ालिब की बस्ती में तन्हा तो कोई नहीं हैं
टूटे दिल में मैंने दर्द को यूँ रख दिया है.
इतना भी ना तोड़ो, मैं मुस्करा ना हाँ सकूँ
एक मुस्कराने के लिए ही है तुझको छोड़ दिया है।

RSD

शर्म बहुत है


निगाहों का असर ही कुछ ऐसा है
वो ही लुभाती हैं जिनमे शर्म बहुत है.
तेरी जुल्फों के सायें में काट जाए बस एक रात
अपनी जिंदगीं के लिए इतना ही बहुत है.

RSD

चिंगारी


मैं लिख रहा हूँ तेरी जुल्फ पे किताब
मेरी कलम लिख देती हैं तेरे रूप को शराब।
मैं लिखता हूँ तेरी आँखों को अपना अंतिम पड़ाव
मेरी कलम लिख देती हैं तेरे वक्षों पे विश्राम।
मैं लिखना चाहता हूँ तुझे चाँद और मेरा आसमान
मेरी कलम लिखती हैं तुझे मेरा गावं-मेरा बिहार.

तेरे जिस्म की अंगड़ाइयां तेरी आखों की गहराइयों पे भारी हैं
तू मिल जाए तो आग लग जाए, तू राख में दबी ऐसी चिंगारी है.

तू दिन भर की धुप के बाद की एक चाँद है
तू लिट्टी-चोखा पे आम की आचार है.
तू मिल जाए तो झूम उठे हर राही
तू सतत-अभियान का आखिरी पड़ाव है.

RSD

1-2-3


इस बार की होली को रंगीन कर देंगे
तुम कहो तो जुर्म कोई संगीन कर देंगें
जितनी भी शिकायतें हैं साल भर से तुम्हारी
मिलते ही सबको १-२-३ कर देंगें।

RSD

किताबों में लिखा तेरा नाम है


ये पढ़ने वाले लोग यूँ ही नहीं परेशान है
की शहर की सभी किताबों में लिखा तेरा नाम है.
जुल्म की इंतहा क्या होगी
दिमाग से तेज लोगों का दिल तेरा गुलाम है.

RSD

मंजिले उम्र भर का पड़ाव नहीं होती


वो अब एक चाय के लिए भी नहीं पूछते
जो कल तक मेरे घर आते बहुत थे.

भीड़ में अब भी खींचता है कोई
मंजिले उम्र भर का पड़ाव नहीं होती।
तुझे इश्क़ है दिल से तो दिल लगा
यहाँ जिस्म से भी रात गुलजार नहीं होती।
तूने तोडा है इस कदर मुझे की अब
किसी और से जुड़ने की कोई बात नहीं होती।
मिलेगा लिट्टी -चीखा तो बैठ जाएंगे खाने को
वरना जिस्म को अब थकन नहीं होती।

तेरे इंतज़ार में अब बस बेबसी है
मेरी तन्हाई का दर्द ये दुरी नहीं तेरी खामोशी है.

RSD

your eyes


The night is full of dreams.
But the sky is empty.
Because your eyes stole all my stars.