यूँ ही खड़ा नहीं हूँ तेरे शहर में


यूँ ही खड़ा नहीं हूँ तेरे शहर में
मेरे सर पे आशीष बहुत है.
वो कहते हैं की मैं उनका दीदार नहीं करता
मेरे दुश्मनों के महफ़िल में वो बैठता बहुत है.
जिनके सीने में दिल है कह दो खुदकुशियां ना करें
शहर में अब खुलने लगी दुकाने बहुत हैं.
इश्क़ में कटरीना नहीं तो मलिक्का बहुत हैं
जिन्हे वो भी नहीं, उनके लिए मिया खलीफा बहुत है.
रात में हर किसी का भरोसा नहीं करते
यहाँ अंधेरों में चलते खंजर बहुत हैं.
तुम जिसे चाँद कह रहे हो शहर का
उसमे तो दाग बहुत है.

RSD

किताबों में आज भी तस्वीरें बहुत है


किताबों में आज भी तस्वीरें बहुत है
इश्क़ में ये दिल टुटा बहुत है.
तुझे प्यास लगे तो लहू से भी मिटा देंगे
मेरी जिंदगी में प्यास बहुत है.
जिस्मानी सुखों का अंत नहीं
राहे-दिल में भी दुःख बहुत है.
मुस्कुराता नहीं हूँ, ये शिकायत है उन्हें
की इन लबों ने नमक पीया बहुत है.
जमाने की नजरों में पिछड़ा होगा बिहार
मगर उस जमीन पे खुशियां बहुत हैं.
यकीं ना हो तो घर बसा के देखो बिहारी का
वहाँ के ससुराल में सुकून बहुत है.
यूँ ही नहीं कहते हैं हमें बाबूसाहेब
छपरा-सीवान, पटना तक हमारा रोआब बहुत है.
हम अब भी ज़िंदा हैं उसे यकीन नहीं होता
इश्क़ में हमें जिसने रुलाया बहुत है.
हमें उतरा बीच हाइवे पे दोस्तों ने ही कार से
मगर बेचनेवालों को भी खुदा ने बनाया बहुत है.
हमने किसी को थमा नहीं उसके ठुकराने के बाद
उसने भी ज़माने को नचाया बहुत है.
उम्मीदों के समंदर में सब है बस वो नहीं
जिसके किनारों पे हमने घर बनाया बहुत है.
जिंदगी की तलाश में कुछ भी नहीं तरस पाएं
इस मुकाम पे भी ये मलाल बहुत है.

RSD

Dreams


Massechutes, Boston, and Harvard
A dream that I chased at the
cost of my motherland.

I prefer walking
In the morning Dew to
a night full of dreams.

RSD

चुनना सपेरा कोई बिहारी को तुम


आँखों में मदिरा, अधरों पे अंगार हैं
तेरी चढ़ती जवानी जैसे मेरा बिहार है
वहाँ गंगा की धार, यहाँ तेरे नयनों के बाण हैं
वहाँ नितीश कुमार, यहाँ तेरी हिरणी सी चाल हैं
वहाँ लिट्टी, घी, अँचार, यहाँ तेरे सोलह श्रृंगार हैं
वो सब मेरे ह्रदय में और तू भी विराज है.
कौन कहेगा तुझे वेवफा
तेरे संग एक रात पे ता उम्र निसार है.

मिश्री की कोई डाली हो तुम
या चासनी में ताली हो तुम.
तुम्हारे वक्ष जैसे पहली की क्यारी हो तुम
तुम्हारे कमर जैसे मेरे खेतों में गेहूं की बाली हो तुम.
जो भी हो जैसी भी हो पर प्यारी हो तुम
देखो, चुनना साथी कोई बिहारी को तुम.
नैनों से कातिल, और कमर से कंटीली हो तुम
नागिन कोई नवेली हो तुम.
पर देखो, चुनना सपेरा कोई बिहारी को तुम.

RSD

मोहिनी मनचली हो तुम


गजब कमसिन-कली हो तुम
जवानी में ऐसी ढली हो तुम
चांदनी वर्फीली हो तुम
मोहिनी मनचली हो तुम
झंकृत जिससे ह्रदय मेरा
रागनी कोई नई हो तुम
डंस रही हो जान-मानस को
नागिन कोई नवेली हो तुम.
कैसे आँखे फेर ले हम
जब लगती मन को भली हो तुम.
नाजुक छुई-मुई सी हो तुम
शाम गोधूलि हो तुम

RSD

ललुआ – भइल, भलुआ -भइल


दर्द की रात ये ढलती नहीं,
पीता हूँ मगर ये चढ़ती नहीं।
कोई तो हो जो जिक्र छेड़ दे उनका जरा
इस ठंढ में आँसू पिघलती नहीं।

मिला जो मोहब्बत तो तू खुशनसीब है
वार्ना फिर मयखाना ही नसीब है.
उम्रभर की ख्वाइशें रख दी समेटकर तेरे जिस्म पर
वो एक जिस्म भी ना मिला तो ये कैसा नसीब है?
वक्त के थपेड़ों ने यूँ रख दिया उलझाकर
कोई भी एरा-गैर कह रहा की यही नसीब है.
बैठ जाएँ हारकर, हम ऐसे भी नहीं
बिहारियों ने अपने हाथों से लिखी नसीब है.
गंगा बाह रही है धरती पे, जाने किसके लिए
गंगा बाह रही हैं बिहार से, ये हमारा नसीब है.

कैसे कह दूँ की उनसे मुलाकात नहीं होती है?
जिस्म दूर है, पर बात रोज होती है.
आँखे मेरी आंसूं उनके, जिस्म मेरा सासें उनकी
मोहब्बत की रातें कुछ यूँ भी होती हैं.

ललुआ – भइल, भलुआ -भइल
फिर भी लागेलूं कमाल के
आवा ना रानी, बैठा ना रानी
बोरसी तपाल जाए आज साथ में

शरम करी, राम-नाम जपीं
अब छोड़ दिन इ-सब काम के
छापरहैया हैं
माज़ा मारेम जीवन के आखरी सांस ले

दामाद मिलल, बहू उतरल
फिर भी लागेलु सलोह साल के
आवा ना रानी, बैठा ना रानी
खा ल सतुआ आज साथ में.

शरम करी, राम-नाम जपीं
अब छोड़ दिन इ-सब काम के
छापरहैया हैं
माज़ा मारेम जीवन के आखरी सांझ ले.

RSD

प्रभु-आएंगे


हमसे इश्क़ करने के लिए यूँ दावं -पेंच ना करो
कभी बैठ कर मेरे संग दान-दक्षिणा करो.

जिसकी चाहत में दरिया सुख गयी,
उस दरिया में फिर बदली बरसायेंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।
प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे, प्रभु-आएंगे।

RSD

प्रभु आवतानी अयोध्या, त तानी आ जाएम कहियो बिहार हो


राउर भोली रे सुरतिया, मोहे मनवा हमार हो
प्रभु आवतानी अयोध्या, त तानी आ जाएम कहियो बिहार हो.

मन तो मोह लेते हो प्रभु मोहिनी इन आँखों से
अब तो रोज देखेंगे जब अयोध्या में विराजोगे।
चरणों से आपके मेरी दूरी अब तो मिटने वाली है
प्रभु दुनिया हमारी आज से हाँ बदलने वाली हैं
की आपके ही चरणों में हर साल दिवाली मनाएंगे।

वो दवा पिलाती भी हैं तो भाईजान कहके


दरियावों को किनारों की चाहत नहीं होती
समंदर तक आते-आते वो आग नहीं होती।
तू घमंड में जिसे पाकर, इतहास हैं उसका,
वो किसी की नहीं होती।
हम बिहारी हैं, नाप लेके हैं आँखों से आकार का
हम सी दें चोली तो वो छोटी नहीं होती।
तू जिसे चाहे चुन ले, तेरा अधिकार है
सबका ससुराल बिहार हो ऐसी किस्मत नहीं होती।

कितना तोड़ोगे हमको नजरों को चुराकर हमसे
हम तो पहले ही टूटे हैं दिल को लगा कर तुमसे।

इश्क़ में तुम्हारी गली का नजराना बहुत है
और इश्क़ में हमारी गली में मयखाना बहुत है.
तुम्हे मिलता है सबकुछ बिना पुकारे
हमारी पुकारों में बस तेरा नाम बहुत है.

कातिल की नजर को सलाम करके
हम बैठ गए है इश्क़ में नाकाम होके।
दर्द भी बता दें तो क्या भला
वो दवा पिलाती भी हैं तो भाईजान कहके।

A sip


I am taking alcohol as I can not take you
I am sipping it slowly as I can not do deep in you
The whole world is meaningless if ours legs don’t hold each other
I am jerking as I cannot jump on you.

RSD