मेरी तन्हाई में शोर बहुत है, इस शोर में मेरी तन्हाई बहुत है
तू मुझे मिली तो नहीं, पर मेरे लिए ये तेरा दर्द ही बहुत है.
दुनिया मुझे नहीं जानती, पर दुनिया जानती है, मैं बिहारी हूँ.
मेरी असफल जिंदगी में, मेरी गरीबी पे, मेरी भुखमरी पे, ये एक तमगा ही बहुत है.
तू जिन चरणों को छूकर, घमंड में चूर बहुत है.
उसे ठोकरों में तौला हैं कई बार मेरे पुरखों ने,
तू ले जा सारा इतिहास, मेरे इतिहास के लिए ये एक पंक्ति बहुत है.
तुम्हारी भूख, तुम्हारी सजावट, शौक, ऊंचाई, सफलता के लिए
मुबारक हो तुमको तुम्हारी अमीरी, मेरे लिए लिट्टी-चोखा ही बहुत है.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
तन ढकने को भी नहीं मैले -कुचैले कपड़े
खाने को नहीं दो रोटी
पर ये रानी तुम्हे देंगे भेंट में सोने की थाली
ये ही आगा हुयो है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
हम भूलें नहीं हैं वो १०० सालों की पीड़ा
ना भूल पाएंगे जालियावाला बाग़
पर ह्रदय पे पत्थर रख के, ये रानी, उतारेंगे हम तेरी आरती
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
आवो महरानी हम उठाएंगे पालकी
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
तुम्हारे लिए दिल के अरमान सजा के गुजारी मोहब्बत लम्हों में
तुम तो मेरे ना हुए कभी पर रहा मैं सदा तुम्हारे ही ख़्वाबों में.
RSD