छल जाना प्रेम में


छल जाना प्रेम में हाँ, प्रभुता का प्रमाण है
येही तो वो पल है प्यारे, जब भक्त, भगवान् पे बलवान है.
जिस नारायण को छलिया कह असुर व्याकुल रहते थे
वो नारायण भक्तों पे अपने नंगे पावँ दौड़ते थे.
पी लेना विष झूठ का प्रेम में, प्रभुता का प्रमाण है
यही तो वो पल है प्यारे, जब महाकाल बन जाते भोलेनाथ हैं.

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पिता के पाँव को


हम उस धरती के वंशज है, जहाँ पिता पुत्र पे मरते हैं -२
हम उस धरती से आते हैं जहाँ पुत्र पिता के लिए लड़ते हैं.
हम उस धरती के वंशज है, जहाँ पिता पुत्र पे मरते हैं -२
हम उस धरती से आते हैं जहाँ पुत्र पिता के लिए लड़ते हैं.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

जब-जब हम थे तुतलाये, चूमा हमारे गाल को
जब -जब लौटे थे जीत के, चूमा हमारे माथ को.
पर जिस दिन था दुनिया को रौंदा, बोले पिता
मेरे माँ को, हे देवी, प्रणाम तुम्हे, नारी तुम महान हो.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

तुमने पिता बनाया मुझको ऐसे हाँ पुत्र का
जो धरा पे रम रहा लिए दम्भ मेरे नाम का
क्षण -क्षण में ह्रदय में मेरे जो आनंद का भण्डार भरें
और पल-पल में सीना मेरा करता है विशाल जो.
तुम पूजा जितना पूजना है हाँ अपने प्यार को -२
हमने तो बस पूजा है धरती, और पिता के पाँव को.

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पिता एव परमसत्यः


पिता एव परमसत्यः,
पिता एव परमेश्वरः।
पिता एव अमृतस्वरूपः,
पिता एव अजरामरः।

पिता एव धर्मग्रन्थः,
पिता एव गीताज्ञानम्।
पिता एव नीलकण्ठः,
पिता एव नारायणः।

पिता एव शाश्वतशान्तिः,
पिता एव कर्ममार्गः।
पिता एव ब्रह्मवाणी,
पिता एव सत्यसारः।

पिता एव प्रथमप्यारः,
पिता एव पथप्रदर्शकः।
पिता एव जीवस्रोतः,
पिता एव मोक्षद्वारः।

पिता एव दीपज्योतिः,
पिता एव दिशां सारः।
पिता एव आदित्यसमानः,
पिता एव अमराधारः।

पिता एव वटवृक्षः,
पिता एव छायावरदानम्।
पिता एव तपस्त्यागः,
पिता एव समर्पणमहान्।

पिता एव आकाशः,
पिता एव भूमेः मानः।
पिता एव गति: शक्तिः,
पिता एव प्राणाधारः।

पिता ही परम-सत्य,
पिता ही परमेश्वर।
पिता ही अमृतस्वरूप,
पिता ही अजर-अमर।

पिता ही धर्म-ग्रन्थ,
पिता ही गीता-ज्ञान।
पिता ही नीलकंठ,
पिता ही नारायण।

पिता ही शाश्वत शांति,
पिता ही कर्ममार्ग।
पिता ही ब्रह्मवाणी,
पिता ही सत्य-सार।

पिता ही पहला प्यार,
पिता ही मार्गदर्शक।
पिता ही जीवन-स्रोत,
पिता ही मोक्ष-द्वार।

पिता ही दीप-ज्योति,
पिता ही दिशाओं का सार।
पिता ही सूर्य समान,
पिता ही अमर आधार।

पिता ही वट-वृक्ष,
पिता ही छाया का वरदान।
पिता ही तप और त्याग,
पिता ही महान समर्पण।

पिता ही आकाश,
पिता ही भूमि का मान।
पिता ही गति और शक्ति,
पिता ही प्राण-आधार।

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जिंदगी


जो रहा न जिंदगी का, वो ही जिंदगी है
क्या भुलाऊं तुझे, तू ही मेरी जिंदगी है.
आसमा को अब तक खबर ही नहीं
कोई मिल जाए एक रात तो हर रात संवर जाए
मेरी सुनी सी मोहब्बत में कोई बहार आ जाए.
हर गुजरता पल, एक जाम सा मिले मुझे
मरहम बनकर कोई ये दर्दे-दिल हर जाए.

जो बदल जाए उसे मौसम कहते हैं
जो ठहर जाए उसे लहार कहते हैं
जो बरस जाए उसे बादल कहते हैं
जो बस जाए दिल में, उसे जख्म कहते हैं.

जो गम तेरे जाने का है
जो गम तेरे खोने का है
वो ही मेरी जिंदगी है
वो ही मेरी तन्हाई है.

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Focus on the Dream


Marriage is not the only way to have a life.
You don’t need a ring to feel complete,
nor a crowd to prove your worth.
You just need the fire that burns inside,
and the silence that lets it breathe.

Let them have the drink,
let them have the night,
let them dance beneath the noise of light.
You — stay with your thoughts,
your ink, your pain,
the quiet room where greatness is born again.

You owe no one an explanation
for walking alone.
The world may call it loneliness,
but you will know it as freedom —
the kind that builds, the kind that dreams.

You were made to rise,
to burn,
to build something that didn’t exist before.

Be alone — not empty, but full.
Full of thought, full of fire, full of direction.
When you walk alone,
you hear your own footsteps
and they become a rhythm —
the sound of becoming.

Marriage is not the only way to have a life.
Creation, compassion, courage —
these too are homes.
So be alone,
not as a void,
but as a voice that rises
to meet its own destiny.

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नारी भारत की


नारी भारत की
कब तक प्रेम में खुद को बांधोगी?
कब तक सपनों की डोर किसी और के हाथ थामोगी?
वीडा उठा कर
मन को बाँध कर
दुनिया को जीत लो अगर अकेले चलोगी।

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Believe


I don’t believe in lies,
Because I believe in your eyes.
No shadow of doubt can hide,
The truth your gaze confides.

Through storms that roar and skies,
Through whispered fears and sighs,
I find my heart’s own prize:
The faith within your eyes.

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वक्त बदला तो सब बदल गए


वक्त बदला
तो सब बदल गए।
शहर में दूकान
और दीवार बदल गए।
आसमा में चाँद और
धरती पे गांव बदल गए।
आँखों के ख्वाब
और चाह बदल गए।
उसकी चोली -२
और कमर के नाप बदल गए।
वक्त बदला
तो सब बदल गए।

रिश्ते और औक़ात
बदल गए।
हँसी के रंग,
मौज के साज बदल गए।
प्यार के खत,
और जवाब बदल गए।
लोग तो लोग,
उनके नक़ाब बदल गए।
घर की चौखट,
शर्म और लाज बदल गए।
उसकी घुँघरैलियाँ,
और नैनों का जोश बदल गए।
वक़्त बदला,
तो सब बदल गए।

गीत की धुनें,
और साज बदल गए।
गली-नाले, रास्ते
और चौराहे बदल गए।
फूलों की खुशबू,
और मौसम बदल गए।
खेत की मिट्टी,
और कुएँ का पानी बदल गए।
उसकी होंठों की मुस्कान,
और गालों का रंग बदल गए।
वक़्त बदला,
तो सब बदल गए।

चाय की प्याली,
और चौखट बदल गए।
रात के दीपक,
और जाम बदल गए।
सावन की रिमझिम,
और तान बदल गए।
सपनों के मीत,
और गीत बदल गए।
उसकी कमर की लचक,
और चाल बदल गए।
वक़्त बदला,
तो सब बदल गए।

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निर्मोही-बिद्रोही, मैं बिहारी हूँ


निर्मोही-बिद्रोही, मैं बिहारी हूँ
मेरे नस-नस में है रस विरह का।
छपरा का बाबूसाहेब, मैं
मदमस्त-अलमस्त खिलाड़ी हूँ।
मेरे नस-नस में है रस विरह का।

माटी के गीत गाता-सुनाता,
भोर में गाता, संझा में गाता,
हर ठेहुनी पे जग का गाता,
मैं भटकता-बंजारा-स्वाभिमानी हूँ।
मेरे नस-नस में है रस विरह का।

पनघट पे बैठा प्यासा पुजारी,
घड़ा भरे बिना भी आनंदित भारी,
मिट्टी में मीत, नदी में नारी,
मैं तन्मय-तपस्वी संसारी हूँ।
मेरे नस-नस में है रस विरह का।

लिट्टी की आँच में जो तपता,
आम्र-छाँव में जब भी रमता,
सावन में झूमे, भादो में गाता,
मैं लोक की कविता का अधिकारी हूँ।
मेरे नस-नस में है रस विरह का।

नागार्जुन की हँसी में रहता,
दिनकर के सूरज-सा जलता,
फूलों में, काँटों में पलता,
मैं मिट्टी की भाषा का उजियारी हूँ।
मेरे नस-नस में है रस विरह का।

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If You Cannot Be a Painter: 10-26-2025


If you cannot be a painter,
then buy a house and paint the floors—
let your brush be a mop,
your colors the light that spills through doors.

If you cannot be an artist,
decorate your house,
buy things for it as if it’s your love,
invite the moon and spring for it.

If you cannot be a singer,
then hum while you fix the tiles,
let water be your orchestra,
and your laughter echo for miles.

If you cannot be a dancer,
then sweep your room with rhythm—
each step on the dusted ground
a quiet ballet of living.

If you cannot be a poet,
then whisper to your walls,
tell them your half-written dreams—
they’ll keep your secrets all.

If you cannot find a lover,
then love the walls instead,
kiss the corners with your care,
and rest your heart where you make your bed.

If you cannot be famous,
then be kind, be strange, be true,
for every humble act of joy
is art the world will never undo.

And if life does not let you create
the way you always planned—
remember, creation is not in the hand,
but in the heart that dares to stand.

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