ये दुनिया के धोखे, ये रिश्ते, जमाना
मेरी सरहदों को ना नापे ज़माना।
क़यामत की रात को होगा फैसला
किसका खुदा है और किसका है जमाना।
गैर भी मिलकर समझाने लगे हैं
कब हुआ है किसी का कभी ये जमाना?
RSD
ये दुनिया के धोखे, ये रिश्ते, जमाना
मेरी सरहदों को ना नापे ज़माना।
क़यामत की रात को होगा फैसला
किसका खुदा है और किसका है जमाना।
गैर भी मिलकर समझाने लगे हैं
कब हुआ है किसी का कभी ये जमाना?
RSD
तू कैसे चढ़ लेती हैं सीढ़िया मेरे खुदा के दर की
उसके मासूम बन्दों को मिटा के.
अरे बेबसी देख मेरे खुदा की
ऐसे सितम पे भी बैठा है मौन धारण कर.
RSD
मेरी जिंदगी को दर्द यूँ डुबाने लगा
ना प्यास ही मिटी ना यार ही गले लगा.
वो सबको सुला रहीं हैं अपनी बाहों में
बस एक हमसे ही पाक रिश्ता उनका रहा.
RSD
तपिश बढ़ी धरती की तो बादल छा गए
बरसने ही वाले थे की हवा उन्हें उड़ा गए.
यूँ ही रह गयी प्यास मेरे अधरों पे
नजरें लड़ाते-लड़ाते वो मेहँदी रचा गए.
RSD
वो अलग लोग थे जो भेजते थे बादलो से पैगाम
ये हम हैं जो हरे पत्ते पे लिख देते हैं तेरा नाम
तू जब जुल्फों को बांधे इनके फूलों से तो ये गुनगुना दें
तेरे कानों में धीरे से कैसे गुजरती है तेरे बिना मेरी शाम.
RSD
तेरी शर्म तुझपे ही नहीं मुझपे भी भारी है
हो जाने दे कोई गुनाह, इस मोड़ पे वो जरुरी है.
तू कल खंजर भी उतार दे तो कोई गम ना होगा
आज किओ रात बस तेरी ही जी हुजूरी है.
RSD
हुस्न जब भी मिला उनका एक नशा सा छा गया
बेवफा ही सही वो, मगर मजा तो दे गया.
अधरों को अधरों पे टिका कर, वो बहुत कुछ सीखा गया
वक्षों तक आते-आते, वो खंजर भी उतार गया.
RSD
मोहब्बत में किसी को कुछ भी हासिल नहीं है.
इस समंदर का कोई साहिल नहीं है।
RSD
वो मिली और बैठी इतने करीब में
तन्हाई लिख गयी ताउम्र मेरे नसीब में.
दरिया कब हुई है किसी किनारे की?
मगर डूबते हैं वो इसी यकीं में.
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अब बारिशों का मौसम वैसा न रहा
रूह, रूह न रही, दिल, दिल न रहा.
सुखाता नहीं हूँ जिस्म को अब भींगने के बाद
दुप्पटे पे उनके मेरा हक़, अब वो हक़ न रहा.
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