A woman never feels
But she develops that feeling in her man.
Rifle Singh Dhurandhar
A woman never feels
But she develops that feeling in her man.
Rifle Singh Dhurandhar
My dream is to have a dream everyday
Because achievements are my past and dream is my future.
Rifle Singh Dhurandhar
There is a spark in her eyes
To live with a perfect man in the future.
There is a man in her arms
She says, “you are my perfect man.”
In her speech, there are words for an ideal world
Kindness, fight against poverty,
Morality, loyalty, and equality.
There is a man in her arms, who is married
She has been asking him to divorce his wife.
On her lips, there are different shades of color
Depending on the situation, night, music
Mood, and emotions.
There is only one color in her heart.
There is darkness, darkness and darkness.
Rifle Singh Dhurandhar
तेरा शौक ही तेरा इश्क है
नादाँ हैं वो, जिन्हे हुश्न से इश्क है.
Rifle Singh Dhurandhar
वो कौन हैं जिसपे वसुंधरा हर्षित है?
वो कौन है जिसपे हिमालय गर्वित है?
वो कौन है जिसे गंगा है पुकारती?
वो कौन है जो मगध की तस्वीर है?
दर्प जिसके मुख पे, भल दिव्यमान है
जब लठ लिए लाठाधीश है रण में
तो क्या सिंकदर और क्या काल है?
वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.
प्रखर, प्रबल, प्रचंड, प्रवीण हो
परांगत हर विद्या में, हर निति में निपुण हो.
नरों में स्वयं तुम इंद्रा हो
संपूर्ण आर्यावर्त के तुम सिंह हो.
इस पुण्य वसुंधरा पे तुम पूजित हो.
रूप में कामदेव, रण में परशुराम हो
विद्या – ज्ञान में साक्षात् वशिष्ठ हो.
वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.
Rifle Singh Dhurandhar
कहते हैं की काँटों में रहकर भी
गुलाब बहुत चटकदार होता है
जिसने इश्क़ किया है उससे पूछो
हुश्न किसका वफादार होता है.
Rifle Singh Dhurandhar
कहते हैं की सफर जितना तन्हा है तेरा
उतने ही मजबूत इरादे हैं तेरे
मंजिल तक आते -आते,
महफ़िल में तुझे भी बुलाया जाएगा।
कहते हैं की गैरों की बस्ती में
अगर घर बनाया है
मेहमान तो बहुत होंगे,
अपना कोई भी एक रात न ठहर पायेगा।
कहते हैं खुदा ने भी क्या?
बनाई है जिसे कहते हैं किस्मत?
हर सफलता को मेहनत और
असफलता को किस्मत बताया जाएगा।
कहते हैं की उसने एक घर बसा लिया है
अब कुछ दिनों में उसे मंदिर बताया जाएगा।
कहते हैं की मुझे दर्द में रख तू गम ना कर
तू जो दर्द में आया, मेरा गम छलक जाएगा।
कच्ची हो या पक्की,
सड़क दूरियां मिटाती है
माँ कैसी भी हो, किसी की भी हो
रोते बच्चे को ना देखा जाएगा।
कहते हैं की होश उड़ा देती हैं
उसकी आदाएं, सब्र कर,
जवानी ढलते – ढलते,
उसको भी भुलाया जाएगा।
Rifle Singh Dhurandhar
कहते हैं की मौसम बदल जाए
तो क्या होगा?
जो चला गया हैं
वो लौट के आएगा क्या?
कहते हैं की शादी वक्त रहते कर लो क्राससा
तो क्या होगा?
वो मेरी महफ़िल में आके नाचेगा क्या?
कहते हैं की सभी सूना रहे हैं
अपनी -अपनी बेगम के किस्से।
मगर किसी ने नहीं कहा
आज माँ-बाप ने भरपेट खाया है क्या?
कहते हैं की मैंने जिंदगी में
कुछ नहीं सीखा
जिसने सीखा, उसे बीबी को
खुश रखना आया है क्या?
कहते हैं की दीवारों के भी कान होते हैं
मगर पडोसी, पडोसी का दर्द समझ पाया है क्या?
Rifle Singh Dhurandhar
कहते हैं की धुप में ना निकला करो
जवान बदन है, कुम्हला जाएगा।
ऐसे अनजान सड़क पे ना जाया करो
कोई भौंरा चुम के उड़ जाएगा।
कहते है की वो बचपन था, सुन्दर था,
जब तुम साथ में थे पिता
अब हालात ऐसे हैं, कोई कही से,
कभी भी लंगड़ी लगा जाएगा।
कहते हैं की खुद को संभाल लो
गिर जाने से पहले
भीड़ में अब कौन है?
जो दौड़ के तुम्हे उठाने आएगा।
कहते हैं की अपना दर्द किसी से ना कहो
जमाना फिर तुम्हे पत्थर का नहीं कहेगा।
Rifle Singh Dhurandhar
वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो.
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.
जुल्म की तलवार लिए आ गया है वो
भारत की सरहदों पे कोई हाहाकार हो
उसके पहले लठ से अपने प्रहार कर दो.
वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो.
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.
देव तक तुमसे यहाँ भयभीत हैं
पुराणों में वर्णित तुम्हारा गीत है.
मगध के मस्तक के तुम चाँद हो
यदुवंशियों के बल का तुम प्रमाण हो.
तो उठो और अपने मुष्ठ का एक प्रहार दो.
वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो.
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.
उस तरफ तलवारे थी जंग के लिए
इस तरफ से लठ लिए लाठाधीश थे चले.
गंगा की लहरों ने भी देखा था वो दिन
धरा पे लठ के प्रहार से, उस तरह यवन थे गिरे।
बिना खून बहाये ही रण को जीत लो.
वीर तुम धनानंद, लाठाधीश हो.
उठो, बढ़ो ऐसे की सिकंदर तक खौफ हो.
Rifle Singh Dhurandhar