बकरिया चरावे गइलन हमर सैया जी
बकरिया के पीछे हमें भूल गइलन जी.
कोई जाके ढूंढे कहाँ गइलन जी?
भरल जवानी में हमें छोड़ गइलन जी.
परमीत सिंह धुरंधर
बकरिया चरावे गइलन हमर सैया जी
बकरिया के पीछे हमें भूल गइलन जी.
कोई जाके ढूंढे कहाँ गइलन जी?
भरल जवानी में हमें छोड़ गइलन जी.
परमीत सिंह धुरंधर
ए दोस्त मोहब्बत में ये ख्वाब हमारा है
तू चाँद बने उस अम्बर का, जिसपे मेरा सितारा है.
परमीत सिंह धुरंधर
चंद – मुलाकातों में दिल भर गया सनम का
अब गैरों के दिल को बहलाया जाएगा।
शौक ऐसे चढ़ा है दिल पे उनके लबों का
ए साकी जाम ये हलक से उतर न पायेगा।
इन 18 सालों में वो बेताब हैं बनने को दादी,
मेरी इस बेताबी को अब नहीं मिटाया जाएगा।
ऐसे रौशन कर रही हैं वो अपने घर को
मेरे आँगन से अन्धेरा मिट न पायेगा।
और क्या होगी सितम की रात इससे बढ़कर?
मेरा दिया, मेरे घर को ही जला जाएगा।
ना पूछों दर्दे-दिल की दवा हमसे
तुमसे ऐसा दर्द न उठाया जाएगा।
परमीत सिंह धुरंधर
रंगे-हालात बदलते -बदलते, कुछ यूँ बदल गयी जिंदगी
जिन्हे छुपाते थे किताबों में, उन्हें अब अश्कों में बहाया जाएगा।
हमसे मत पूछो, खंजर था या गोली थी
अब तो इस मौत के बाद भी उसे नहीं भुलाया जाएगा।
परमीत सिंह धुरंधर
चूड़ी संभालीं की पायल संभाली
चोली – चुनर में हलचल उठsता।
कहिया ले जोगाइन धन राजा के हम?
पडोसी रतिया के छप्पर लाँघsता।
कौगो चिठ्ठी आ पाती पठइनि
सुनी ए राजा, मन अब बाँध तुरsता।
का कहीं सखी, अब आपन परेशानी
जोबना भी अब गोद में किलकार मांगsता।
परमीत सिंह धुरंधर
Hot, hot
Sweet, sweet
somthing like that
I need, need
You are just like that
I have been dreaming
So lets try again
To enjoy the heavy rain
To feel we are together
And made for each other.
I have almost finished
The journey of the life
It is painful to see
That you just arrived
lets try again
To fly in the same airplane
To enjoy the vacation
And feel for each other.
Parmit singh Dhurandhar
प्रेम जितना मधुर होगा
प्रेम उतना ही सहज होगा.
प्रेम जितना सहज होगा
प्रेम उतना ही निकट होगा।
प्रेम जितना ही निकट होगा
ह्रदय उतना ही जवाँ होगा।
हृदय जितना ही जवाँ होगा
रूप उतना ही पुलकित होगा।
रूप जितना ही पुलकित होगा
सहचर्य उतना ही मधुर होगा।
परमीत सिंह धुरंधर
जवनिया हिलोर मारsता
तोता, तोता ठोर मारsता।
पियवा, अनाड़ी, परदेस में बईठलबा
पाकल अमरूदिया, चोर तुरsता।
ए सखी, का कही अब आपण परेशानी
रतिया में, खटिया पर खटमल चढ़sता।
परमीत सिंह धुरंधर
वो सैया जी रउरा से देहिया लगा के
ना रहनी घर के, ना रहनी घाट के.
माई-भौजाई रखतारी २४ घंटे अब आँख
अंगना-दुवारा होता बस हमरे बात
की अबकी होली के बाद, हो जाइ पीला हमर हाथ.
वो सैया जी रउरा से अंगिया लगा के
ना रहनी घर के, ना रहनी घाट के.
परमीत सिंह धुरंधर
ए समंदर, मुझसे इश्क़ के दास्ताँ ना पूछ
हम राजपूतों की शान है, हम लुटा देतें है अपना सब कुछ.
वो दरिया हैं, बंध जाना नहीं है उन्हें कुबूल
और मैं बंध जाऊं, ऐसा नहीं मेरी नशों का खून.
O sea, do not ask me stories of love
We are Rajput, we are known to sacrifice everything we own for our love.
They are like streams, they don’t have to be tied
And I accept to be tied, that is not possible due to my lineage.
परमीत सिंह धुरंधर