संभाल के रख अपनी अदा,
हुनर को
मैं भी जी रहा हूँ, कमा रहा हूँ
सिर्फ करने को इनसे
हर रात गुस्ताखियाँ।
RSD
संभाल के रख अपनी अदा,
हुनर को
मैं भी जी रहा हूँ, कमा रहा हूँ
सिर्फ करने को इनसे
हर रात गुस्ताखियाँ।
RSD
पहला प्यार कैसा होता है
बिहार जैसा।
उजाड़ हो गया जहाँ मेरा पर वही मेरा नशा है
कोई और उजाड़े उसे तो फिर दर्द होता है.
जाने कैसे बाँट लेते हैं लोग माकन और देश को
मैं पूर्वांचल का हूँ, पर वो मिथिलांचल मांगते हैं
तो दर्द होता है.
यूँ ही नहीं कहते हमें, बाबूसाहेब छपरा के
हमारे सीने में बिहार बसता हैं.
तेरी चुनर को मैं सजा न सका
ये तेरी विवशता, तेरी गरीबी नहीं है
ये मेरी नाकामी, मेरी वेवफाई हैं.
फटी, मैली -कुचैली कपड़ों में तू
आज भी मीठी सी शहनाई है.
हस ले ये दुनिया चाहे जितना भी
की ढल गयी तेरी जवानी, और
अब झुर्रिया हैं चेहरे पे
पर मैंने जी और देखि तेरी अंगराई है.
तेरी लचकती कमर पे बिहार मेरा
उलझती नज़र पे छपरा बसा
वादियाँ राजगीर की, वो वक्ष तेरे
विचरता है मन, हर प्रातः जहां।
तेरी जुल्फें सघन, उफनती नदी
अधर तेरे, कोई सोइ नागिन
पटना की प्यारी कचौड़ी गली
तेरी वो नाभि गहरी
भटकता है दिल, हर शाम जहां।
तेरी चाल, सोनपुर का वो मेला
जिससे जलता था लाखों का चूल्हा
वो कटाव, वो कसाव तेरा, गंगा का किनारा
लगती थी नाव मेरी, हर रात जहां।
ना मिली नौकरी, तू छोड़ गयी
जैसे पैसे के लिए छूटा गावं मेरा।
तेरी बाहें मेरा खलिहान
अब कोई और सो रहा है जहां।
तेरी यादें, तेरा चेहरा, बनारस
दिल का चैन, लुटा है जहां।
RSD
इहे कमरिया पे खेत कतना बिकाइल बा
देख ला हाल बाबूसाहेब के, छपरा लुटाईल बा.
जिनगी जवन रहे हरियर, उँहा अब पतझड़ आइल बा.
इहे कमरिया पे खेत कतना बिकाइल बा.
RSD
छलकने से पहले तेरे आँसु खबर हो जाती है मुझे
तुम्हे अब भी यकीन नहीं की किस कदर चाहा है तुझे
तेरी ख़ामोशी को तुझसे पहले समझ लेता हूँ मैं,
तुझसे पहले राह के काँटों पे पाँव रख लेता हूँ मैं.
तेरे इश्क़ का सागर इतना गहरा है मेरे दिल में,
डूबकर हर बार बस नया साहिल मिलता है इसमें.
तू चाहे जितना भी दूर है मुझसे अभी इस पल में,
मैंने दिल की धड़कनों में सदा ही पाया है तुझे.
RSD
वीरों की धरती पे हैं फिर से लड़ाई सांप से
सत्ता हमको बाँट रही है जात -पात के नाम पे.
हम लाये हैं आज़ादी जिसपे हुए लोगों कुर्बान रे
पर रोज-रोज माला डालते बस जवाहर लाल पे.
लड़े वीर कुंवर सिंह, और भगवान् विरसा साथ में
फिर भी दोनों आज अलग-अलग हैं सत्ता के दावं से.
पहले बांटा अपने लालच में हमें बिहार-झारखण्ड में
अब फिर से वो ही लोग मिथिलांचल हैं मांग ते.
मैं तो विरोध करूँगा इसका, दोस्तों तुम भी आवो साथ में
बाँटने नहीं देंगे अपना बिहार, इस बार सत्ता की चाह में.
RSD
कइल कौना नजरिया से प्यार रजऊ
रतिया में तरस गइल खाट रजऊ।
कवन जादू कइल, बतावा रजऊ,
दिलवा में बस के देलह काहे घाव रजऊ?
RSD
वक्त के नसीब में लिखे हैं कुछ किस्से
हम कहीं, तुम कहीं, पर जुड़े हैं दिल के रिश्ते।
यकीं नहीं होता की हम कभी साथ चलें थे
मगर साथ चले थें कभी हम, यही सोच के जी रहे.
वो सेंट्रल बिल्डिंग, वो हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट,
कहाँ -कहाँ ना अपनी हुई थीं बातें,
वक्त की धारा में हमारी वो राहें कहीं खो गए।
मगर हवाओं में आज भी बसी हैं तुम्हारी यादें।
तुम्हारी हंसी की गूंज, आज भी दिल में हैं समाई,
मुस्कान ओठों पे बस तुम्हारे नाम से हैं आई।
भले ही दूरियां दूर रख रही हैं हमें तुमसे,
मगर तुम्ही धड़काते हो अब भी दिल की ये धड़कनें।
वक्त के नसीब में लिखे हैं कुछ किस्से,
हम कहीं, तुम कहीं, पर जुड़े हैं दिल के रिश्ते।
भले ही हम बुड्ढे, और साथ चलने की राहें पुरानी हो गईं,
मगर उन राहों की मिट्टी की खुसबू आज भी हैं हमारे दिल में।
RSD
अंगिया के कइलह अंगार रजऊ
छोड़ के आपन सुनर बिहार रजऊ.
का होइ ई दौलतात – शोहरत
जब देखलह ना हमर श्रृंगार रजऊ.
छोड़ के माटी, खेत, खलिहान,
भूल गइल आपण पहचान रजऊ.
दे गइलह अइसन विरहा के आग
अब के सुनी हमर मन के पुकार रजऊ.
तू ना सही कोई और चरी
चौंरा के ई हरियर घास रजऊ.
अंगिया के कइलह अंगार रजऊ
छोड़ के आपन सुनर बिहार रजऊ.
RSD
A tree grows for growth,
Not to judge the coo of a cuckoo or a crow.
Even when scarred by the axe’s blade,
In its tender youth,
It reaches skyward, undeterred,
Focusing on apical truth.
A tree grows for growth,
Not merely for a sprawling spread.
Its roots dig deep into the earth’s embrace,
While its arms stretch wide,
In quiet grace.
No matter the wounds it bears,
Each ring tells stories of strength and care.
For growth is its purpose, steady and true,
A timeless lesson for me and you.
RSD
Night is not just for dreams,
Let’s light up life with gleams.
We’ll tidy the house, set it right,
And savor the beauty of the night.
Then plunge into waters so serene,
Sip on rum with a dash of gin.
Laughter will echo, joy will beam,
As stars join in the flowing stream.
We’ll fold our clothes, neat and fine,
And dive into stories that intertwine—
Tales from a book, old yet new,
Weaving magic for me and you.
So let the night be more than rest,
A time for living, at our best.
With love, with laughter, and shared delight,
Let’s make this our perfect night.
RSD