दौलत


शौक रखता हूँ तैरने का सागर की लहरो पे,
पर कमबख्त ये प्यास दरिया तक खींच लाती है.
सोचता हूँ कहीं गावं में बस जाऊं, पर
दौलत की चाहत शहर तक खींच लाती है.

परमीत सिंह धुरंधर