पिता बन कर


हर जनम में पिता बन कर
हे प्रभु शिव
रखों मेरे सर पे अपना हाथ.
और मैं पुत्र बनकर
आपके चरणों को धो के पीता रहूँ
जपता रहूँ आपका नाम.

 

परमीत सिंह धुरंधर

शिव आप ही मेरी आत्मा


शिव आप ही मेरी आत्मा,
शिव आप ही हो मेरे परमात्मा।
शिव, आप को ही है मुझे पाना,
ये ही है मेरी कामना, ये ही है मेरी उपासना।
शिव, मुझे उद्दंड बना दो,
शिव, मुझमे घमंड भर दो.
पर सदा चरणों में अपने रखना,
ये ही है मेरी कामना, ये ही है मेरी उपासना।
धरती से आकाश तक, प्रलय मचा दूँ,
त्राहिमाम मचा दूँ,
हाहाकार मचा दूँ.
मुझे अमृत नहीं, आप सा विष ही है चखना,
ये ही है मेरी कामना, ये ही है मेरी उपासना।
शिव आप ही मेरी आत्मा,
शिव आप ही हो मेरे परमात्मा।
शिव, आप को ही है मुझे पाना,
ये ही है मेरी कामना, ये ही है मेरी उपासना।

 

परमीत सिंह धुरंधर