रहनुमाओं की भीड़ थी और मैं लूट गया,
ये ही तो उनकी अदा थी हर शख्श मुख मोड़ गया.
जरा सी नाकामयाबी रिश्ते समझा देती है,
कीमत कम हुई मेरी बाज़ार में और वो सौदा बदल गया.
परमीत सिंह धुरंधर
रहनुमाओं की भीड़ थी और मैं लूट गया,
ये ही तो उनकी अदा थी हर शख्श मुख मोड़ गया.
जरा सी नाकामयाबी रिश्ते समझा देती है,
कीमत कम हुई मेरी बाज़ार में और वो सौदा बदल गया.
परमीत सिंह धुरंधर