सोलहगो होली खेलनी मायका में,
मायका में,
पर अंग पे रंग चढ़ल ससुरा में.
पाहिले त आँखवा में आंसू आइल,
न अब माई-बहिनी भेटाई रे,
पर रोम-रोम पुलकित हो गइल,
जब नंदी मरलख पिचकारी से.
पिचकारी से.
गावं-गावं होली खेलनी मायका में,
मायका में,
पर अंग पे रंग चढ़ल ससुरा में.
दोपहर भइल फिर साँझ भइल,
सुने न कोई हमर गारी रे,
अरे चूड़ी टुटल, कंगन टुटल,
जब धइलख देवर अँकवारी में.
नाच-नाच होली खेलनी मायका में,
मायका में,
पर अंग पे रंग चढ़ल ससुरा में, परमीत
Tag: a festival of colors
होली
कबूतरों की भीड़ में एक नर कबूतर बोला होली आई -होली आई,
तो सारे मादा कबूतर टूट गए उसपे चिल्लाते हुए हैप्पी होली-हैप्पी होली, परमीत.
परमित और होली…
कौन कहता ही की होली रंगों का खेल है,
हमने तो इसे हाथो से खेला है परमित.