कुत्ता और चाँद


कुत्ते दौड़ते हुए गलियों में,
उनका रूप चुराने को.
अम्बर पे चाँद हंस रहा,
देख अपने दीवानों को.
कुत्तों की किस्मत में नहीं,
चाँद से अपने मिल पाना।
ना चाँद के भाग्य में है,
इन कुत्तों जैसा कोई दीवाना।

परमीत सिंह धुरंधर

जुदाई


वो शाम सी ढली,
और खो गयी,
रात के अंधेरो में,
की हम फिर मिल न सके.
उसे जिद्द था मुझसे दूर जाने की,
मुझे गुरुर था उसके निगाहों की,
उसकी मोहब्बत में,
बनकर तारा यूँ मैं टूटा,
की फिर कभी ये जुदाई मिट न सकी.

परमीत सिंह धुरंधर

चाँद


कहते हैं की,
चाँद भी कभी-कभी मुश्किलों में आ जाता है,
जब आँगन में उसके अमावस छा जाता हैं.
बादलों के बीच उड़ने वाला,
तारों के बीच में मुस्कराने वाला,
उस एक रात, कहीं जाके छुप जाता हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

The girl with the newspaper


The girl with the newspaper,
took my heart forever.
In the moving train,
first time,
I felt the heart-pain.
That night, I dreamed a lot,
because, she was so hot.
With black eyes,
and long hair,
took my heart forever.
The girl with the newspaper,
took my heart forever.

Parmit Singh Dhurandhar

किस्मते-दर्जी


दिल कब का टूट कर, समुन्दर में बह गया,
वो अब तक दरिया में प्यार ढूंढती हैं.
इश्क़ का मेरा चूल्हा, जल कर कब का बुझ गया,
और वो अब तक सिलवट पे सरसो पिसती हैं.
निगाहों में उनके हैं कितने ही परदे,
कोई हाय, शर्म, लज्जा तो कोई मोहब्बत कहता हैं,
जब भी देखता हूँ इन पर्दों के अंदर,
बस सोना, चांदी और पैसों का चमक दीखता हैं.
कौन कहता है की मोहब्बत दिलवालो का खेल हैं,
आज भी उनका दुपट्टा कहीं और,
तो कमीज, कहीं और ही सिलता है.

परमीत सिंह धुरंधर

कभी फिर


तुम ऐसे मिले मुझसे,
की नजरे हटी न कभी फिर.
तन्हा-तन्हा सा रहता हूँ,
नींदे आयीं न कभी फिर.
अच्छा है की हम्मे ये दूरी है,
मेरी भी मज़बूरी है.
तुम जो अपने पास होते,
हम सो न पाते कभी फिर.

परमीत सिंह धुरंधर

लाल साड़ी


लाल साड़ी में आपको देख के,
दिल तो बईमान हो गया हैं.
हम ही अभी तक,
इस ईमान को थामे बैठे हैं.
ये जानते हुए की आप,
किसी और की हो रही हो,
जाने क्यों आपका आँचल पकड़े बैठे हैं.
जाने किस्मत में क्या लिखा है,
और आप कितना समझोगी,
मगर हर रात,
आपके लिए दिया बुझा के बैठे हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


तेरी मोहब्बत का क्या सिला दें,
हम निगाहों से पीते हैं, तुम चेहरे पे हिजाब रखते हो.

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न


शरारत हुई है तो,
गुस्ताखी भी होगी।
हुस्न अगर पास है,
तो इतना न इठला,
निश्चित ही,
क़यामत भी होगी।

परमीत सिंह धुरंधर

यकीन


मुझे पीने का शौक हैं,
तू पिलाने की शौक़ीन बन.
छोड़ ये वफ़ा, बेवफाई की बातें,
तू एक बार तो,
इन बादलों की जमीन बन.
मुझे बरस कर,
मिट जाने का डर नहीं।
तुझे भींग कर,
लहलहाने में भय है.
कब तक टकटकी लगाओगे,
खुदा के दर पे मदद की,
कभी तो अपने योवन का यकीन बन.

परमीत सिंह धुरंधर