खूबसूरत से एक मोड़ पे,
तन्हा सा मैं बैठा था.
तू गली में जब निकल कर आई,
किस्तों में दिल टुटा था.
नजरे झुका कर, तू चल रही थी,
अपने आँचल में सब कुछ छुपाएँ,
तेरी लहराती जुल्फों की,
हर लट से मेरा दिल उलझा था.
परमीत सिंह धुरंधर
खूबसूरत से एक मोड़ पे,
तन्हा सा मैं बैठा था.
तू गली में जब निकल कर आई,
किस्तों में दिल टुटा था.
नजरे झुका कर, तू चल रही थी,
अपने आँचल में सब कुछ छुपाएँ,
तेरी लहराती जुल्फों की,
हर लट से मेरा दिल उलझा था.
परमीत सिंह धुरंधर
योवन के धुप में,
तू ऐसे है खिल गयी.
जैसे अमीरों के बस्ती में,
गरीबों के चादर उड़ी.
तेरे अंगों पे ऐसे बहकने लगे,
मोहब्बत के परवाने।
जैसे छोटी सी बस्ती में,
होली में भांग हो बटी.
परमीत सिंह धुरंधर
तेरी ऐसी नजरिया है काली, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी नजरिया है डाली, राणा भी मस्ती में बहक गए.
सोने सा योवन तू लेके, चलती है जो पनघट पे,
भींगे-भींगे तेरे तन से, सुलगता है सबका तन-मन रे.
तूने ऐसी पहनी रे चोली, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी सिलाई रे चोली, राणा भी मस्ती में आ गए.
झुकी-झुकी नजरो से जो तू देखे एक बार,
मेवाड़ में बहने लगती है, मस्त-वयार।
तूने ऐसी है पेंच लड़ाई, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी है ढील बढ़ाई, राणा भी मस्ती में बहक गए.
खिला-खिला तेरा अंग, छेड़े मन में मेरे मृदंग,
जो भी देखे तुझे, चाहे तेरा ही संग.
तूने ऐसी है आँचल उड़ाई, हम भी दीवाने हो गए.
तूने ऐसी है ली अंगराई, राणा भी मस्ती में आ गए.
परमीत सिंह धुरंधर
जिसकी एक चाल पे दुनिया मिट गयी,
जाने कैसे हमने अपनी साँसों को संभाला है.
परमीत सिंह धुरंधर
धीरे-धीरे विचलित हो रहा है मन, रूप तेरा देख के,
संयम कैसे रखूं, बता जरा अपने नयनन से.
कोई सजा, मौत की भी परवाह नहीं,
एक बार मिल जाए अधर मेरे तेरे अधरों से.
परमीत सिंह धुरंधर
आँखों में माया रखती हैं,
ह्रदय में छलावा रखती हैं.
तुम कहते हो प्रेम उसे,
वो तो दिखावा करती हैं.
परमीत सिंह धुरंधर
हुस्न की हर नजाकत, एक राज है,
जब पर्दा गिरता है, टूटता ख़्वाब है.
परमीत सिंह धुरंधर
पतंग जो टूट जाए धागे से,
लौट के फिर उन हाथों से नहीं उड़ता.
ये सच है,
मैं आज भी दीवाना हूँ तेरे हुस्न का,
पर तेरे लौटने की दुआ मैं अब नहीं करता.
परमीत सिंह धुरंधर
चाँद मिल जाए तो फिर,
ताउम्र काट जाए चांदनी में.
पर मेरी मान,
रोज नया दिया जलाने में भी नशा है.
परमीत सिंह धुरंधर
एक लड़की,
एक लड़की.
एक लड़की,
कालेज में आयी है.
भोला-भला चेहरा,
कातिल अंगराई है.
एक लड़की,
कालेज में आयी है.
खुली जुल्फें, और
थोड़ा शरमाई है.
एक लड़की,
कालेज में आयी है.
किताब दबाये सीने से,
पलकों को झुकाते आयी है.
एक लड़की,
कालेज में आयी है.
चलती है ऐसे रुक-रुक के,
जैसे बदली कोई छाई है.
एक लड़की,
कालेज में आयी है.
कल से जाएंगे हर लेक्चर,
देखें, किसकी किस्मत में आयी है.
एक लड़की,
कालेज में आयी है.
एक लड़की,
कालेज में आयी है.
परमीत सिंह धुरंधर