तहार चोलिया के तोड़ के बटन रानी,
आज कहबू त हो जाइ खुले – आम रानी।
ऐसे भी जानअ ता सारा ई जवार रानी,
तहार चोलिये में फँसल बा हमार जान रानी।
परमीत सिंह धुरंधर
तहार चोलिया के तोड़ के बटन रानी,
आज कहबू त हो जाइ खुले – आम रानी।
ऐसे भी जानअ ता सारा ई जवार रानी,
तहार चोलिये में फँसल बा हमार जान रानी।
परमीत सिंह धुरंधर
तनी धीरे -धीरे, तनी धीरे -धीरे,
दौड़ाई ई टमटम राजा जी,
हचका मारे,
त अ दुखे कमरिया राजा जी.
ऐसे जोश में ना होश गवाईं राजा जी.
चूड़ी टूटल, केसिया खुलल,
अब का साड़ी खोलेम राजा जी?
तनी लोक-लाज,
शरम कुछु त अ बचाईं राजा जी.
तनी धीरे -धीरे, तनी धीरे -धीरे,
दौड़ाई ई टमटम राजा जी,
हचका मारे,
त अ दुखे कमरिया राजा जी.
पोरे -पोरे देहिया के तुड़ के रखनी,
कहिया समझेम,
इ शरीरिया भी ह हाड़ -माँस राजा जी?
तनी बैठे ना दीं,
फुरसत में दुगो घड़ी राजा जी.
तनी धीरे -धीरे, तनी धीरे -धीरे,
दौड़ाई ई टमटम राजा जी,
हचका मारे,
त अ दुखे कमरिया राजा जी.
जाने माई का -का समझा के भेजली,
रउरा आगे कउनो उपाय ना बाचल राजा जी.
तनी देहिया पे रहेदी साड़ी राजा जी.
तनी धीरे -धीरे, तनी धीरे -धीरे,
दौड़ाई ई टमटम राजा जी,
हचका मारे,
त अ दुखे कमरिया राजा जी.
छोड़ी अब गइल छपरा और सिवान,
अँगना में रहीं आ खाईं गरम-गरम राजा जी.
तनी हमरों के लुटे दी जवानी राजा जी.
तनी धीरे -धीरे, तनी धीरे -धीरे,
दौड़ाई ई टमटम राजा जी,
हचका मारे,
त अ दुखे कमरिया राजा जी.
परमीत सिंह धुरंधर
अइसन तहार जोबन ये रानी,
की चरचराये खटिया और चुये पलानी।
आरा, छपरा से बलिया तक,
तहरे किस्सा, तहरे कहानी।
बलखाये अइसन तहार कमर,
की पुरवा में उठे पछुआ के लहर.
दिल्ली छोड़ के तहरे खातिर,
दुआर ओगरतानी।
जहिया कह देबू, घर से उठालेम,
मर्द अइसन हइन,
जेकर अभियों बाटे खाटी पानी।
अइसन तहार जोबन ये रानी,
की चरचराये खटिया और चुये पलानी।
परमीत सिंह धुरंधर
हमारा जोबनवा के गईंठी ए राजा,
तहरा बथनियाँ में कहिया जली?
मन भर के चिपरी पथा गइल बा,
रउरा आलाउवा में कहिया जली.
अंग – अंग हमार गेहूं के बाली भइल बा,
कहिया थ्रेसर से दवनी होइ?
गन्ना, सरसों से भड़ गइल खलिहान,
अब महुआ के रस, राजा कहिया चली?
हमारा जोबनवा के गईंठी ए राजा,
तहरा बथनियाँ में कहिया जली?
अंखिया भी देखअ सुरमई बहिल बा,
केशिया में सावन गदराइल लागल बा.
अंखिया के हमारा तीर ए राजा,
तरकश पे रउरा कहिया चढ़ी?
गजरा के हमार फूल ए राजा,
खटिया पे रउरा कहिया टूटी?
हमारा जोबनवा के गईंठी ए राजा,
तहरा बथनियाँ में कहिया जली?
परमीत सिंह धुरंधर
तनी घूँघट में छुप के गोरी,
दालान में आजा.
भरल दुपहरिया में ठंडा,
दही-चूरा खिला जा.
अबकी के कटनी में,
नया कमरघानी बनवा देम.
तनी अंचरा गिरा के गोरी,
कमर नपवा जा.
छोड़ अ अब कहल,
बाबुल के प्रेम के कथा।
तनी फुरसत में,
तोता -मैना के किस्सा वाच जा.
अब की के दवनी में,
नायका लहंगा दिलवा देम.
तनी अंचरा गिरा के गोरी,
कमर नपवा जा.
कब तक माई-भाई के चिंता में,
जोबन के बांध बू.
कभी फुरसत में,
हमसे तेल लगवा जा.
अबकी के फगुवा में,
नायका चोली सिलवा देम.
तनी अंगिया हटा के,
जोबन नपवा जा.
तनी घूँघट में छुप के गोरी,
दालान में आजा.
भरल दुपहरिया में ठंडा,
दही-चूरा खिला जा.
अबकी के कटनी में,
नया कमरघानी बनवा देम.
तनी अंचरा गिरा के गोरी,
कमर नपवा जा.
परमीत सिंह धुरंधर
पलकवाँ ना गिरे लोग के, देखी हलकवाँ सुखी जाला l
गोरी के जवनियाँ के, सारा जिला में बा हाला l
लगावेले कजरवाँ जब, दिन में रात होइ जाला l
चँदवो मलिन होके, घाटा में छिपी जाला l
केशिया बिखरावे जब, सावन के घटा छा जाला l
चूमेला गोरी के अचरियाँ के, धरती पे आकाश आई जाला l
पतली कमरिया से जब, जोबना के भार ना सहाला l
तब पनियाँ गगरियाँ के, देहिया में छलक छलक जाला l
सायवाँ उठवलस जब, हिलेला मलमलिया के नाला l
जवनका के का कहे के, बुढ़वों में जोश भर जाला l
सरवाँ घर घरे गगरी जब, नितंबवाँ वीणा के तम्बू बुझाला l
ऊपर से झुलावे चोटिया के, त वीणा में तार बन जाला l
मेनका के रूप पे जब, जैसे विश्वामित्र के तपस्या टूटी जाला l
वैसे दिल धुरंधर सिंह के, गोरी के चोली में फँस जाला l
These lines were written by my father Dhurandhar Singh.
अंखिया -से – अंखिया ऐसे मिलाव गोरी,
ताहर चुनर सरक जाए, और उड़ जाए मेरी नींद गोरी।
देहिया – के – देहिया के पास, अतना लाव गोरी,
की ताहर कंगन खनक उठे, और हमार दिल गोरी।
परमीत सिंह धुरंधर
सैयां खोले ला चोलिया हमार,
गुलेलिया मार-मार के.
सैयां खूबे ने खिलाड़ी बा हमार,
चूमे ला गालिया, बात – बात पे.
सखी, का कहीं, कइसन बारन,
सखी, का कहीं, का -का करेलन।
सैयां ढूंढे ला ढोढिया हमार,
अंखिया पे रुमाल बाँध के.
सैयां खूबे ने खिलाड़ी बा हमार,
चूमे ला गालिया, बात – बात पे.
घडी – घडी पास आके,
पूछे कब होइ रात,
दुनिया के अनाड़ी,
सेजिया पे बाटे नु चालाक,
सैया काटे ला दही सजाव,
अँखियाँ में आँख डाल के।
सैयां खूबे ने खिलाड़ी बा हमार,
चूमे ला गालिया, बात – बात पे.
परमीत सिंह धुरंधर
ये भोजपुरी है, जिसने मेरे टूटे ह्रदय को फिर धड़कना सिखाया।
ये भोजपुरी है, जिसने मुझे महुआ का रस पिलाया, बिना महुआ के गाछ के.
ये भोजपुरी है जिसने मुझे गरीबी में भी शराब का नशा दिया।
और ये भोजपुरी है, जिसने मेरे हर तृस्कार, अपमान पे माँ सा गले लगाया।
ये भोजपुरी ही है, जिसने मुझे Aftab Taiyab सा प्यारा दोस्त दिया।
चाहे जितना भी वल्गर हो, भोजपुरी मेरे अपनी है.
परमीत सिंह धुरंधर
माई कहले बारी,
तहसे हम बात ना करीं,
की तू बड़ा बदनाम बड़ा हो.
हमार माई कहले बारी,
तहके घर ले चलीं,
की ताहार नाक बाटे सुन्दर बड़ा हो.
चलअ, हटअ पीछे, हमके मत छेडअ हमके,
बाबुल से पहले मांगअ ई हाथ हो.
देखअ ताहरा खातिर कंगन ले आइल बानी,
पाहिले पहनाएम ई ताहरा हाथ हो.
देखअ हाथे तक रहअ, पहुँचा मत धरअ,
हमार धड़कअता अब दिल हो.
त छोड़अ माई – बाबुल के चिंता,
अब हो जाएगअ सार खेल हो.
परमीत सिंह धुरंधर