आपन गावं के चिड़िया रहनी


अइसन -वइसन खेल ए राजा,
मत खेल आ तू हमारा से.
आपन गावं के चिड़िया रहनी,
लुटले रहनी कतना खेत बाजरा के.
जाल बिछा के कतना शिकारी,
रहलन हमरा आसरा में.
अइसन घुड़की मरनी,
हाथ मल आ तारन आज तक पांजरा में.
अइसन -वइसन चाल ए राजा,
मत चल आ तू हमारा से.
आपन गावं के खिलाड़ी रहनी,
कतना के पटकनी दियारा में.
ढुका लगा के बइठल रहलन,
कतना चोर चेउंरा में.
अइसन दावं मरनी,
आज तक दर्द उठेला उनकर जियरा में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

चोली तहार अब दू गो हाथ मांग अ ता


धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
ऐसे मत बाँध अ अंचरा के कमर से,
ढोरी पे तहार कौआ दावँ मार अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
भीगल तहार चोली में बाढ़ आइल बा,
छोटी सी पोखरा में ज्वार आइल बा.
ऐसे मत खोंस अ साया ऊपर करके,
कछुआ भी देख अ आँख मार अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
मत जलाव अ अपना जवानी के तू,
ऐसे दिन-रात एक प्राण के खातिर।
कभी सुस्ता भी ल बथानी में हमारा,
की खटिया हमार अब दू गो देह मांग अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
लचकत तहार कमरिया पगडण्डी में,
अरे मुखिया के घर तक भूचाल मार अ ता.
कब तक रख बू बाँध – बाँध के,
की चोली तहार अब दू गो हाथ मांग अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.
आव अ बैठ अ पास तनी,
तहार रूप अब हमार साथ मांग अ ता.
रखें तहारा के आपन बनाके,
तहार अंग – अंग अब हल्दी के रंग मांग अ ता.
धोबन तहार जोबन उछाल मार अ ता,
दरिया के पानी में ताप मार अ ता.

 

परमीत सिंह धुरंधर

छोट पड़ल खटिया


हमरा से कहअ सैयां, जियरा के बतिया,
केने – केने धोती खुलल, आ केने कटल रतिया।
मत पूछह रानी, लिखल रहल यह देहिया के दुर्गतिया,
अंग – अंग टूटे लागल, जब छोट पड़ल खटिया।
भुइंया काहें ना पसर गइल अ, मीठ मिलित निंदिया,
अइसन का रहल की ना छुटल तहरा से खटिया।
मत पूछ ह रानी, कइसन निक रहल खटिया,
देहिया के गिरते ही धड़ लेहलख निंदिया।

परमीत सिंह धुरंधर

नैहर के खेल हो


हमारा से सैया जी पुछि मत नैहर के खेल हो,
माई कहत रहली बाबुल से एक रात,
की ई लड़की त हाथ से गईल निकल हो.
गऊअन के पंडित – मुल्ला, भड़स हमर पानी,
आ दर्जिया त सिये चोलिया बिना लेले मोल हो.
हमारा से सैया जी पुछि मत नैहर के हमर चाल हो,
रोजे नापी खेता – खेती, चौरा – चौरी, एक सांस में,
अइसन रखले रहनी अहिरन के छोरा संग मेल हो.
बहिना कहलस माई से एक रात हो,
की ए माई, दिदिया त आपन बारी बड़ी बिगड़ैल हो.

परमीत सिंह धुरंधर

सब कुछ छुपा के भी कत्लेआम कइले बारु


पटाखा भइल बारु, पटाखा भइल बारु।
जोबना तहार अइसन, घटा भइल बारु।
एके ही चोलिया के सीए दस बार हो,
जैसे दरजी पिए महुआ रसदार हो.
सब कुछ छुपा के भी कत्लेआम कइले बारु,
छोटका उमरिया में ही घाव कइले बारु।
छपरा – से – मलमलिया एके दिन त कइलू,
लहरा के अचरिया रहिया में आपन,
सबके कलेजा मोह लेले बारु।

This is about a girl who is so beautiful that she is unable to go out. Just one day she went out and the whole word fell for her beauty.

परमीत सिंह धुरंधर

कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू


कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
अइसन बा ताहर नजरिया, की चकाचक लागेलू।
कजरा पे तहरा बहकल सारा छपरा,
आ लहंगा से तहरा लहकता देवरिया।
जब करेलू टाइट चोली, मीठा ख़्वाब लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।
हिरणी सी चलके, मोह लेलु मोहनिया,
देख गदराइल जवानी, जाम भइल मलमलिया।
जब उड़ावेलु ओढ़नी, जिला टॉप लागेलू।
कमरिया करे लपालप, की लॉलीपॉप लागेलू।

परमीत सिंह धुरंधर

I wrote this after listening this video

बुढऊ राजधानी


अइसन तहर जवानी ए रानी,
अइसन तहर जवानी ए रानी।
बालम भये रसिया,
बुढऊ राजधानी।
नाद के बैल,
भुखाइल खड़ा.
खेल में फसल,
सुख के भइल काला।
अइसन तहर कमरिया ए रानी,
देवर धइलन खटिया,
सास भरे पानी।

परमीत सिंह धुरंधर

चोली ए रानी


आव अ उघार दीं,
चोली ए रानी,
आव अ उघार दीं चोली।
फेन पहन ली ह अ भिनसहरा,
जाएब हम जब कोतवाली।
आव अ उघार दीं,
चोली ए रानी,
आव अ उघार दीं चोली।
इहाँ ना कोई हाड्डा आई,
ना तितैया ही कोई काटी।
मत डर अ तू,
हम करेम रात भर रखवाली।
आव अ उघार दीं,
चोली ए रानी,
आव अ उघार दीं चोली।

परमीत सिंह धुरंधर

तनी रहे दीं सियन चोली के


तनी धीरे -धीरे छुईं राजा जी,
अभी – अभी त अ जवानी आइल बा.
तनी रहे दीं,
तनी रहे दीं सियन चोली के,
दर्ज़ी लगन में बाहर गइल बा.
काहे ऐसे, काहे ऐसे बउराइल बानी,
सारा धन त अ रउरे खातिर बा.
तनी रहे दीं,
तनी रहे दीं कुछ थाती राजा जी,
अभी कउन उमर भइल बा.
काहे ऐसे, काहे ऐसे भुखाइल बानी,
सारा त अ दही जामल बा.
तनी रहे दीं,
तनी रहे दीं कुछ छाली राजा जी,
घिउवा बड़ा महंग भइल बा.

परमीत सिंह धुरंधर

धनिया से धान भइल बारु


जब से जवान भइल बारु,
धनिया से धान भइल बारु.
चमकअ तारु, चमकावअ तारु,
नाक में नथुनिया डाल के.
लहकअ तारु, लहकावअ तारु,
योवन पे चुनरी डाल के.
पूरा खिल के खलिहान भइल बारु,
जब से जवान भइल बारुं,
धनिया से धान भइल बारु.
रूप ताहर नयका,
रंग ताहर नयका.
सोना के भाव भइल बारु,
जब से जवान भइल बारुं,
धनिया से धान भइल बारु.
महकअ तारु, महकावअ तारु,
केसिया में गजरा डाल के.
छलकअ तारु, छलकावअ तारु,
अँखियाँ में कजरा डाल के.
सरसो से महुआ भइल बारु,
जब से जवान भइल बारु,
धनिया से धान भइल बारु.
लहर उठा दअ ,
जहर पिला दअ.
अंग-अंग से गुलाब भइल बारु,
जब से जवान भइल बारु,
धनिया से धान भइल बारु.

परमीत सिंह धुरंधर