कह अ न परमीत तानी अंखिया से,
केने-केने धोती खुलल रतिया में.
मत पूछ अ रानी इह बतिया रे,
बड़ा गजन लिखल रहल देहिया के.
नशा अइसन रहल की होश गवा देहनी,
अखियाँ खुलल त अ रहनी खटिया पे.
रात भर में लूट गइली सारा जोगवाल थाती,
बस रह गइल एगो नथुनिया रे.
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नथुनिया दिलाई ना
तानी दूर-दूर से ए बालम धुरंधर जी,
नयनन में प्यार जगाई ना,
खेत कहीं नइखे भागल जात,
कहियो आँगन में खाट बिछाई ना.
कब तक बहेम खुदे बैल नियर,
कभी हमके भी छपरा घुमाई ना.
चूल्हा-काठी करत, हमार कमर टूट गइल,
गेहूं-धान बोआत, राउर उम्र हो गइल,
कब तक करेम इह दुनियादारी,
कभी गंगा में भी संगे नहाईं ना.
अरे बबलू बो, गुड्डू बो के, देख के जियरा जले,
एगो बालम के कमाई पे, रोजे सजाव दही कटे,
दौलत बचा के का होइ,
कभी एगो नथुनिया, हमें दिलाई ना.