तानी सुनी न दिलवा के बतिया,
कोरा-कोरा मन बा, कोरा रे रतिया।
ए भोला तानी सुनी ना,
का कह अ तारी दुखिया।
गावें-गावें खेलनी,
सावन के झूला भी,
सब सखियाँ के गोद भरल,
बस रह गैनी हम ही,
कोरा-कोरा हमर आचार, कोरा रे देहिया।
तानी सुनी न दिलवा के बतिया,
कोरा-कोरा मन बा, कोर रे रतिया।
ए भोला तानी सुनी ना,
का कह अ तारी दुखिया।
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शिव
तुम शिव हो, तुम शंकर हो,
इस जगत के तुम सवामी निरंतर हो।
मैं अज्ञानी पापी प्रभु,
ज्ञान के तुम सागर-समुन्दर हो.
तुम कालजयी, कालनायक,
विश्व के तुम संहारक हो.
मैं तुच्छं-सुक्ष्म,विरह-वाशना से बंधा,
निर्गुण के तुम धुरंधर हो.