मुझे उठ के लड़ जाने दे मेरी माँ


एक बार मुझे उठ के लड़ जाने दे मेरी माँ,
तेरी आबरू, तेरी आरजू सब सवारूँगा.
हंस के रौंद गए हैं जो हमें,
उनके हर निसान को मिटा के जाऊंगा.
रख न सका जो इस जुबान को,
तो तेरी चरणों में सर कटा के जाऊंगा.
फिर से लहलहाएगी हरियाली,
फिर से तेरा दमान खुशहाल होगा,
ऐसे सजाऊंगा तेरा आँचल,
तेरे सर पे सोने का ताज होगा.
एक बार मुझे उठ के लड़ जाने दे मेरी माँ,
हर तरफ तेरा जय – जैकार होगा.