भीष्म


न भीष्म हुआ है,
न भीष्म होगा,
ऐसा है,
पराक्रम मेरा।
जो दिशाएं,
बदल दे मेरी,
ऐसा नहीं हुआ है,
कोई सबेरा।
सूरज की किरणें,
भी मद्धम हो जाएँ,
मेरी तीरों पे।
बसंत को भी बाँध दूँ मैं,
चाहूँ तो,
अपनी बागों में।
नारी का कोई लोभ नहीं,
जीवन का कोई मोह नहीं,
ऐसा है शौर्य मेरा।
न भीष्म हुआ है,
न भीष्म होगा,
ऐसा है पराक्रम मेरा।
जो दिशाएं,
बदल दे मेरी,
ऐसा नहीं हुआ है,
परमीत, कोई सबेरा।