दिल्ली में बिल्ली


दिल्ली शहर में मेरी बिल्ली भी भाग गयी,
ऐसी भागी वैसी भागी दुनिया पूरी जान गयी.
मैंने खिलाया उसे भर पेट दूध-भात,
खुद ही काटी खली पेट जारी की रात.
पर वो भी निकली कमबख्त बदजात,
मुझ गरीब आशिक को ही लात मार गयी.
दिल्ली शहर में मेरी बिल्ली भी भाग गयी,
ऐसी भागी वैसी भागी दुनिया पूरी जान गयी.
कितना हम में था प्यार भरा,
कितनी रातों को हमने साथ काटा.
देख के एक मोटा-ताजा बिलाड़,
सब कुछ एक पल में सब भुला गयी,
मुझ गरीब आशिक़ पे ही आँखे अपनी तान गयी.
दिल्ली शहर में मेरी बिल्ली भी भाग गयी,
ऐसी भागी वैसी भागी दुनिया पूरी जान गयी.

 

परमीत सिंह धुरंधर