मेरे कुत्ते भी बड़े कमीनें हैं


मेरे कुत्ते भी बड़े कमीनें हैं,
काटने से पहले चुम लेते हैं.
देखने में बड़े मासूम हैं,
और आँखों से मजबूर लगते हैं.
मगर गोद में आते ही सीधा,
वक्षों पे निशाना साध देते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

कुत्ते


यहाँ-वहां हर तरफ, हर रह में,
खर्डे हैं अनजाने कुत्ते,
अंधकार में भोंक रहे
जाने किसकी चाहत में.
दुर्लभ है एसा सानिध्य,
दोड़ रहे हैं एक साथ,
जाने किस मंजिल की चाहत में.
चीरते हैं अंधकार की खामोसियाँ,
चमकाते हैं आँखों को, जैसे
आसमां की बिजलियाँ.
पुकारते हैं, सर को
आसमां की तरफ कियें,
गा रहे हैं गीत मिलन का वलेंतिने’स डे पर,
ना जाने परमित, किस की चाहत में.