जख्मों का समंदर


तेरा मुस्कराना,
मुझे जख्मों का समंदर दे गया.
फासले तो आ ही गए हैं दरमियाँ,
मगर निगाहों का असर रह गया.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न वालों को बस छावं ढूंढते देखा है


मोहब्बत भले न मिली जिंदगी में,
नफरतों ने मुझे आगे बढ़ने का मुद्दा दिया है.
जमाना कर रहा है कसरते मुझे मिटाने की,
मेरी साँसों ने तो बस मुझे जिन्दा रखा है.
किसने कहा की हुस्न के आँचल में जन्नतों का द्वीप है,
हमने तो बस यहाँ साँसों को सिसकते देखा है.
रातों के अँधेरे में तो वफ़ा हर कोई निभा दें,
दिन की चिलचिलाती लू में,
हमने हुस्न वालों को बस छावं ढूंढते देखा है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न-इश्क़ और खंजर


खूबसूरत लम्हों में लपेट के जो खंजर चला दे,
वो हुस्न तेरा है.
बिना जुल्फों में सोएं जो ओठों का जाम चख ले,
वो इश्क़ है मेरा।
तुझे गुरुर है जिस योवन पे,
वो ढल जाएगा एक दिन सदा के लिए,
और मैं यूँ हैं चखता रहूँगा योवन का रस,
चाहे रौशनी मेरी आँखों की या आँखे मेरी,
मुद जाए सदा के लिए.

 

परमीत सिंह धुरंधर

कुत्ते और वक्ष


कुत्ते भी क्या – क्या चमत्कार करते हैं!
कोई चुम रहा है उनकी पाँवों को,
तो कोई वक्षों से लगा बैठा है.
अब किस्मत और मौसम,
दोनों कुत्तों के साथ है शहर में.
ठण्ड भरे इस मौसम में,
मैं शायर बनके रोता हूँ,
और कोई उन्हें अपनी बाहों,
तो कोई वक्षों पे सुलाता है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

रातों में यहाँ कंगन खनकते बहुत हैं


हुस्न सजता बहुत है, रंग और पोशाकों में,
पर उसके दामन में वेवफाई के दाग बहुत है.
वो कहते हैं बार – बार चिल्ल्ला कर,
राम – गौतम बुध की गलतियां।
मैं जब कहता हूँ आम्रपाली – मेनका,
तो वो बैठते, चुप बहुत हैं.
सिर्फ तबाही नहीं होती गोली और बारूदों से,
मोहब्बत में मिटे बेटे पे चित्कारती यहाँ माँ बहुत हैं.
कोई आँखों में काजल लगा के ये न कहे की शर्म है,
रातों में यहाँ, आज भी कंगन खनकते बहुत हैं.
बहुत देखा है मैंने हुस्न वालो का चरित्र,
यहाँ खूबसूरत चेहरों के पीछे छल बहुत हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

वो आज भी देखती हैं


वो आज भी देखती हैं,
मुझे आँखों से,
एक टकटकी लगा के.
घर है, दौलत है,
बच्चे हैं,
फिर भी जाने क्या,
रख्खा है मुझसे,
एक आस लगा के.
वो आज भी देखती हैं,
मुझे आँखों से,
एक टकटकी लगा के.
जवानी है, खूबसूरती है,
शोहरत है,
फिर भी जाने क्या,
रख्खा है खामोस निगाहों में,
मुझसे उम्मीद लगा के.
वो आज भी देखती हैं,
मुझे आँखों से,
एक टकटकी लगा के.
पति है, पैसा है,
पुरस्कार है,
फिर भी जाने क्या,
मुझसे चाहती हैं,
मेरा सब कुछ मिटा के.
वो आज भी देखती हैं,
मुझे आँखों से,
एक टकटकी लगा के.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न और कुत्ता


एक भीड़ सी लगी है कुत्तों की,
और हुस्न वाले कहते हैं,
की पुरुष में अहंकार बहुत है.
सब – कुछ रख दिया है उनकी चरणों में,
लात खा कर भी वही पड़े हैं,
और हुस्न वाले कहते हैं,
की पुरुष में अहंकार बहुत है.
सबसे बड़ी अहिषुण्ता, दोगलापन है ये,
नारी ही उजाड़ रही है घर नारी का,
और हुस्न वाले कहते हैं,
की पुरुष को जिस्म की भूख बहुत है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत:सौ जिस्म को पाने की एक होड़ है


मोहब्बत अब वो महब्बत नहीं,
बस शिकवा-शिकायत है.
सौ जिस्म को पाने की,
बस एक होड़ है.
नारी सौ दहलीज को लांघ कर भी,
जहाँ शर्म से अब भी बंधी है,
ऐसे असंख्य झूठे कहानियों की,
एक किताब है.
झूठे आंसू, झूठे वादे,
झूठे अदाओं से भरपूर,
बेवफाओं की एक दास्ताँ है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

व्रह्मचर्य


एक बार टूटा दिल मेरा ऐसे,
अब सौ भुजंगों का विष सह लूँ.
नारी के प्रेम से अच्छा है,
मैं शिव सा विषपान कर लूँ.
छल रहीं हैं सारी सृष्टि को,
जाने कब से अपने प्रेम में.
इनके सौंदर्य को निहारने से अच्छा है,
मैं लक्ष्मण सा पर्ितयाग कर दूँ.
बस दिखावा है इनका दम्भ,
अपने चरित्र के मान का.
इनको अपना बनाने से अच्छा है,
मैं शुक सा व्रह्मचर्य धारण कर लूँ.

परमीत सिंह धुरंधर

Kashmiri girl


If I have to marry a Kasmiri girl, I would not ask her religion. In other words, if every girl were bad, I would chose a Kasmiri girl without asking her age, character and religion.

Parmit Singh Dhurandhar