खूबसूरत लड़कियां : मगरमच्छ के आंसू से बन्दर फंसाती है


खूबसूरत लड़कियां एक जाल बिछाती हैं,
मगरमच्छ के आंसू से बन्दर फंसाती है.
पुरुष-प्रधान समाज से इनको है शिकायत,
मगर अपने डैड को परफेक्ट मैन बताती हैं.
नारी के अधिकार पे स्वतंत्र विचार रखने वाली,
ये अपने भाई के प्रेमिका को चुड़ैल बताती हैं.
इन्हे पसंद हैं रहना खुले आसमान के तले,
घोंसलों को बनाना इनके अरमान नहीं,
मगर तीस तक पहुँचते – पहुँचते,
ये शादी – शादी और सिर्फ शादी चिल्लाती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

Perfection


If she can not sense the smell, she is not perfect. And, if she has a good sense of smell, she can not be characterful and trustworthy.

Parmit Singh Dhurandhar

#noBraDay


Without the bra,
You look like Cleopatra.
So lets celebrate #noBraDay,
Twice in a year.
One on Oct. 13 and
The other will be on your
Birthday dear.
Nothing can compensate,
The feeling I have for you.
It does not matter,
Whether you put on a bra,
Or you don’t wear.
So lets celebrate #noBraDay,
Every day except Sunday.

Parmit Singh Dhurandhar

खेल


ये इश्क़ – मोहब्ब्बत क्या है,
बस दो जिस्म का खेल.
हम खेले तो धोखा,
और वो खेले तो प्रेम।
वो छोड़े,
तो हम में ही कुछ कमी है,
और हम छोड़ दें,
तो हमें नहीं है उनकी क़द्र।

परमीत सिंह धुरंधर

विश्वामित्र और मेनका


मुझे कोई उपेक्षा नहीं,
की तुम सीता – सावित्री बन के रहो,
मगर ये भी तो कहो,
जब कह ही रही हो खुद ही,
की अब तक कितनो को,
सीता – सावित्री बनके छला है.
मैं उन पंडितों में नहीं जिन्हे बस,
विश्वामित्र का दम्भ ही दिखा है,
मैं वो पंडित हूँ,
जिसकी कलम ने हमेसा,
मेनका को बस चरितहीन ही लिखा है.
भूख से बिलखते बच्चे को जिसने छोड़ा,
बस इंद्रा और सवर्ग के चाह में,
लिखते रहे सब उसको बस नारी की विवसता,
मैंने उसको बस व्याभिचार ही लिखा है.

परमीत सिंह धुरंधर

कड़वा सच


लडकियां बस अपने आशिकों की मौत चाहती हैं,
उनके आंसू, उनके दुःख और उनकी लावारिस लाश चाहती हैं.
शान से कहती हैं की उनको सती – सावित्री ना समझें,
मगर सती – सावित्री होने का फिर भी ढोंग करती हैं.
शादी के मन्त्रों पे हंसने वाली हर लड़की,
तीस के बाद शादी के महत्त्व की बात करती है.
और वो लौटा रहीं हैं एक – एक करके अपने पुरस्कारों को,
जिस दहसतगर्दी के खिलाफ एक जुट हो कर,
उन्ही दहसतगर्दीयों को, अपनी जवानी में,
अपने आँचल में शयन-सुख प्रदान करती हैं.
लडकियां बस अपने आशिकों की मौत चाहती हैं,
उनके आंसू, उनके दुःख और उनकी लावारिस लाश चाहती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

छावं


जिन बाहों के लिए वो छोड़ गयीं,
मेरे घर के दरवाजों को.
उसी टूटे – फूटे दरवाजों की छावं में,
अपनी मसरूफियत से दूर सुस्ता लेती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

मोहब्बत


कसम क्या दे उन्हें अब मोहब्बत का,
वो दिन थे जब हम जला करते थे.
अब ये राते हैं,
जब वो जला करती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

हालात बदल रहें हैं


वो हाल पूछती है हमसे मौसम का,
जबकि उनके शौहर मौसम विभाग में हैं.
हालात इस कदर बदल रहें हैं,
की उनके बच्चे भी अब हमारी सोहबत में हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

Oh my daughter don’t be afraid


Oh my daughter,
Oh my daughter,
Don’t be afraid.
I am always with you,
Whatever will be the instance?
I was never the perfect man,
Neither I am.
But I want you
To grow in my hand,
But I want you
To walk with confidence,
I want you to keep the smiling face.
Every morning,
I want you to blaze like a Sun,
Every evening,
I want you to sing like a bird,
I want you to flow like a river,
Whether it is mountain or boiling season.
If you want to love someone,
Don’t care for the religion,
But never break anyone’s heart,
Never try to play smart,
Never use family as an excuse,
Because I want you to be different than,
These independent Indian girls.
Oh my daughter,
Oh my daughter,
Don’t be afraid.
Don’t need to be perfect,
Just be confident,
I am always with you,
Whatever will be the instance?
I want you
To walk with confidence,
And keep the smiling face.

Parmit Singh Dhurandhar