यूँ आँचल में इमली नहीं छुपाया जाता


हर किसी से रिश्ता नहीं बनाया जाता,
हर शहर को यूँ ही नहीं छोड़ा जाता।
नाली और नहर में अंतर है दोस्तों,
जवानी नहीं आने तक नहर पे नहीं जाया जाता।
बचपन मैंने भी गुजारें हैं,
आम और आवंले के खट्टेपन पे.
जब तक कुछ, कहीं ठहर न जाए,
यूँ आँचल में इमली नहीं छुपाया जाता।
मुझसे शिकायत मत करों मेरे बड़बोलेपन की,
अब सच यूँ सीने में दफनाया नहीं जाता।
हुस्न की महत्वाकांक्षाएं बढ़ रही हैं,
पर्दा, शर्म, चरित्र और पुरुष को मिटाने की,
मेरी कलम से भी अब ये बोझ नहीं उठाया जाता।
मैं यूँ ही बैठा रहूँगा तेरे इंतज़ार में उम्र भर,
मुझे डूबने का गम नहीं,
पर किनारों पर अब नहीं रहा जाता।

 

परमीत सिंह धुरंधर

 

There are some work which one should not do until time comes. However, people like to do that just for the shake of experience but refuse to take the responsibility. They hide and dont like if people point towards it.

मेरा अपना कोई घर क्यों नहीं है?


जो तन्हा कर गए हमें उम्र भर के लिए,
अब बरसों बाद मिले तो पूछते हैं,
मेरा अपना कोई घर क्यों नहीं है?
बहुत मासूमियत है, उनकी आँखों में आज भी,
तभी तो कह रहे थे,
मुझे उनकी तरह बच्चों से प्यार नहीं है.

 

Parmit Singh Dhurandhar

Yesterday, I met her and she asked why do not I have my family yet. With all her innocence, she herself gave the reason within a second that I do not love children like she does.

Life is like Titanic


Life is like Titanic,
When we need,
It sinks.
Don’t try,
Don’t try,
Let it go.
Let it go,
And give your
Best smiles.
I know my heart,
Wants to hug you.
But lets keep the distance,
Between us.
Love is like Titanic,
Whenever I try,
It sags and gives tears.
Don’t try,
Don’t try,
Let her go.
Let her go,
With her best smiles.

 

Parmit Singh Dhurandhar

Your eQTL and my aQTL


I collect your smiles,
As the function of rnorm,
Lets plot the distribution, baby
Lets plot the distribution,
Whether it is normal,
Or binomial.
The fisher test would tell,
Whether it is love,
Or infatuation.

 

Parmit SIngh Dhurandhar

ग़ालिब बना दिया


जिंदगी के शौक ने काफिर बना दिया,
मजनू बनने चले थे, ग़ालिब बना दिया।
इस कदर उनके ओठों की तलब हुई,
भरी जवानी में ही शराबी बना दिया।

 

परमीत सिंह धुरंधर

ग़ालिब बना दिया


जिंदगी के शौक ने काफिर बन दिया,
मजनू बनने चला था, ग़ालिब बना दिया।
हुस्न वालो की शहर में होता है,
चर्चा मेरा एक बेवकूफ के रूप में.
क्यों की मैंने उनको,
उन्हीं का आइना दिखा दिया।

 

परमीत सिंह धुरंधर

रिश्ते भी इन आँखों के काले हैं


तेरी आँखे ही काली नहीं, ए दिलरुबा,
रिश्ते भी इन आँखों के काले हैं.
जो भी डूबा हैं इन आँखों की मस्तियों में,
आज तक रो रहे उसके घरवाले हैं.
तेरी राते भीं जगमग करती हैं,
और उनके दिन भी जैसे गहरे अंधियारे हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

ख्वाब


सैकड़ों हैं संसार में,
जो तुमपे निसार हो जाएँ।
हम तो बस आपका,
दीदारे-ख्वाब रखते हैं.
आपकी खूबसूरती का ऐसा,
आयाम है.
की हर रात पलकों में,
तुम्हारा ख्वाब रखते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

हुस्न


खूबसूरत जाल फैलाने पर,
फंसता हर मर्द है.
मगर चाँद सिक्के उछल कर देखो,
फिर हुस्न कैसे बदलता रंग है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

दिया वो ही बुझाते हैं


दिया वो ही बुझाते हैं,
जो शर्म का ढिढोंरा पीटते हैं.
जहाँ जमाना चुप हो जाता है,
हम वहाँ अपनी आवाज उठाते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर