दिल जो उमंगें लेने लगे.
तो समझो की जवानी है.
दिल जो बैठ जाए.
तो समझो कोई कहानी है.
दिल जो,
गुजरने लगे मयखाने से,
तो समझो,
कोई आँचल बदलने लगा है.
दिल जो,
सवरने लगे गुसलखाने में,
तो समझो,
कोई सपनो में आने लगा है.
परमीत सिंह धुरंधर
दिल जो उमंगें लेने लगे.
तो समझो की जवानी है.
दिल जो बैठ जाए.
तो समझो कोई कहानी है.
दिल जो,
गुजरने लगे मयखाने से,
तो समझो,
कोई आँचल बदलने लगा है.
दिल जो,
सवरने लगे गुसलखाने में,
तो समझो,
कोई सपनो में आने लगा है.
परमीत सिंह धुरंधर
एक लड़की का भोला दिल,
बोला,
एक शाम को,
खेलोगे क्या मेरे साथ,
छत्री फूटबाल,
एक शाम को.
शातिर है , शैतान है छत्री ,
आँखों में एक चमक आ गयी,
बोला,
खेलूँगा, मगर
सिर्फ मैं रात को.
विनती हुई, गुहार हुई,
छत्री के चरणों में गिरी,
एक हसीना ने प्रेम-गुहार की.
मुकाबला हुआ,
एक भोली लड़की का एक शैतान से,
शुभारम्भ हुआ , हंग्कोक पे ,
मीठे-मीठे दो जाम से.
पसीने-पसीने हो गयी ,
एक सीधी सी लड़की,
निष्ठुर है, चालक है छत्री ,
खूब छकाया, उसे
एक रात को……Crassa