तुमसे मोहब्बत में बड़ी प्यास मिलती है
तू तो उड़ जाता है, संग बस तन्हाई रहती है.
परमीत सिंह धुरंधर
तुमसे मोहब्बत में बड़ी प्यास मिलती है
तू तो उड़ जाता है, संग बस तन्हाई रहती है.
परमीत सिंह धुरंधर
धरा पे मैं फिर से
कोई भगीरथ बनूँगा क्या?
मेरे लिए हे शिव,
आप अपनी जटायें खोलेंगे क्या?
जब मन भय से ग्रस्त हो
कर्म पे बढ़ा अटल हो
मैं पुकारूँ,
तो हे शिव आप मेरे लिए आवोगे क्या?
मैं छोडूंगा नहीं हे शिव चरण तुम्हारे
तुम सुनो, ना सुनो,
रहूँगा तुम्हे पुकारते
मुझे यूँ आँखों की धारा में
हे शिव डूबता छोड़ोगे क्या?
परमीत सिंह धुरंधर
ना रखा कर रुख पे यूँ पर्दा मेरी जान
चाँद के दीदार का हक़ हमें भी है.
परमीत सिंह धुरंधर
ये रौशनी चेहरे पे, ये सादगी चेहरे पे
किस्मत में फासला लिख गया
वरना रखते हम आपको
जीवन भर अपनी पलकों पे.
परमीत सिंह धुरंधर
शहर को क्या पता है किस्मतें -द्वन्द का?
मेरे दिल से पूछों जिसे नशा है तुम्हारे अंग – अंग का.
उलझनों में बांध के क्या मोहब्बत करोगे?
ख्वाइस तुम्हे दौलत की और मुझे तुम्हारे वक्षों का.
राहें बदल – बदल कर कौन सी मंजिल पा लोगे?
स्थिर होने पे बुद्ध के, द्वार खुला था ज्ञान का.
परमीत सिंह धुरंधर