आँखों से सलाम लीजिये


दर्द में हर दिल का पैगाम लीजिये
मुस्करा कर ना सही
फिर भी आँखों से सलाम लीजिये।

मिल गए है कई साथी नए राहों में
पर पुराने खिदमतगारों का अपने
नजरें – करम लीजिये।

माना की पर्दा जरुरी है
पुराने दरकते दीवारों पे
मगर कभी तो
इन चारदीवारों में भी बैठ लीजिये।

 

परमीत सिंह धुरंधर

मैं प्रतिव्रता नहीं हूँ


मैं हूँ एक भारतीय नारी
संस्कारों से भरी
काजल लगाती हूँ आँखों में
और करवा चौथ का व्रत भी रखती हूँ
पर मैं प्रतिव्रता नहीं हूँ
मैं पतिव्रता तो नहीं हूँ.

पूजती हूँ पति को
अपने परमेश्वर मान कर
उनकी एक खांसी पे जगती हूँ रात भर
लम्बी उम्र को उनके
उपवास भी रखती हूँ
पर मैं प्रतिव्रता नहीं हूँ
मैं पतिव्रता तो नहीं हूँ.

हसने – खेलने की कोई
उम्र नहीं होती
जवानी में ही सिर्फ
अंगराई – अटखेली नहीं होती
सांझ ढले उनकी नींदे गहरी हो जाती हैं
लेकिन मैं अब भी चाँद बनकर
बादलों में छूप जाती हूँ.
पर मैं प्रतिव्रता नहीं हूँ
मैं पतिव्रता तो नहीं हूँ.

 

परमीत सिंह धुरंधर

 

मोदी :अविश्वास प्रस्ताव-2018 (part 2)


माँ
जमाना देखेगा
मेरे रंग को
जब मैं रंग दूंगा
तेरे आँचल को.

अभी तो बहुत पड़ाव
आने बाकी हैं
जहाँ पड़ेंगीं मुझको गालियाँ।
मगर हर पड़ाव पे
जमाना झुकेगा
तेरे चरणों में.

उन्हें धीरज इतना भी नहीं
की मेरे जाने का इंतज़ार कर लें.
वो जिन्हे सिर्फ सोने -जवाहरात
लगाने का शौक है अपने तन से.
वो मुझे गले लगाएं या ना लगाएं
उन्हें एक दिन लगाना होगा
तेरी माटी को अपने तन – मन से.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मोदी :अविश्वास प्रस्ताव-2018


जो धरा को अब भी अपना धरोहर हमझते हैं
वो जान लें की अब सत्ता पे मोदी बैठें है.
आसान नहीं है उन्हें उठा देना
वो जो आसान पे सम्पूर्ण तपो बल से बैठें हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

जिंदगी


रंग जिंदगी में कुछ भी हो
तन्हाई का न हो.
तकलीफ जिंदगी में कुछ भी
बेवफाई का ना हो.

महफ़िल में कोई आये मेरे या ना आये
इंकार तुमसे ना हो.
गले से मेरे कोई लगे या ना लगे
शिकवा तुमसे ना हो.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तनी देखि ना पतरा पंडित जी


बड़ी भारी भइल बा जोवन
कर अ ता बड़ी जुलम।
तनी देखि ना पतरा पंडित जी
कहिया लागि लगन?

चढ़ल जाता इ उम्र
सूना – सूना जाता हर सावन।
तनी देखि ना पतरा पंडित जी
कहिया लागि लगन?

सारी सखियाँ भइली लरकोरी
झुल अ तारी भरके गोदी
ललचे रहल – रहल हमरो मन.
तनी देखि ना पतरा पंडित जी
कहिया लागि लगन?

 

परमीत सिंह धुरंधर

मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का


ए चाँद मेरी गलियों में
आना – जाना छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.

जिसने धारण किया है
विष को अपन कंठ में
उसके अधरों के पान की
अभिलाषा छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.

भूत – भभूत – डमरुँ
पे जो रीझ जाए
उसपे नयनों के
तीर चलाना छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.

जब – जब आस टूटती है
मानव की
तब प्रभु शिव हरते हैं
पीड़ा भक्तों की.
मुझे ऐसी भक्ति से
भटकाना छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.

मुझसे भी बलिष्ठ और कर्मनिष्ठ
बहुत है यहाँ।
इस अवघड-फ़कीर को
आजमाना छोड़ दे.
मैं भक्त हूँ भगवान् शिव का
मुझे ललचाना छोड़ दे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

फ्रांस जीत ले गइल विश्व ख़िताबवा


चोलिया के हमारा
मसकअता सियनवा।
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो लूट जाइ सारा जोवनवा
बलम, गवनवा करा द ना.

सबके लागल बा हमपे नयनवा
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो टूट जाइ धीर के बाँधवा
बलम, गवनवा करा द ना.
मुखिया चाहअता हमसे मिलनवा
बलम, गवनवा करा द ना.

भइल मुश्किल बा खेळल अब फगुआ
बलम, गवनवा करा द ना.
जवार सारा, चाहे पकड़े के कलइया
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो टूट जाइ ना त हमरो चारपाइयाँ
बलम, गवनवा करा द ना.

फ्रांस जीत ले गइल विश्व ख़िताबवा
बलम, गवनवा करा द ना.
हेमा ले अइली जीत के सोना के मेडलवा
बलम, गवनवा करा द ना.
कहियो टूट जाइ हमरो नथुनिया
बलम, गवनवा करा द ना.

परमीत सिंह धुरंधर

वृक्षों को ना काटो


ए मेरे दोस्तों
वृक्षों को ना काटो।
तुम तो अपनी जमीन छोड़ रहे
किसी को तो जमीन पे रहने दो.

आसमान में उड़ना
पक्षियों को पसंद है.
मगर तभी तक
जब उनका कोई बसेरा हो.
तुम तो अपना घर तोड़ रहे हो
किसी को तो घर बसाने दो.

परमीत सिंह धुरंधर

मेरे माँ की दुआओं का दौर है


सितारों से कह दो
ये रहनुमाओं का दौर है.
तन्हा हूँ मैं यहाँ
मगर ये मेरे इरादों का दौर है.

मिटना मेरे नसीब में तय है
मगर मिटने से पहले
ये मेरे हौसलों का दौर है.

मेरी बुलंदियों को किसी की
ताबीज नहीं चाहिए।
मेरे सर पे मेरी माँ का हाथ है.
जब तक खड़ा हूँ यहाँ
तो समझों की
मेरे माँ की दुआओं का दौर है.

परमीत सिंह धुरंधर