तन्हाई में अब कभी याद कर लेती हैं वो पुराने गुजरे दिन,
अमीर की बीबी बनकर सेज पर शायद उन्हें,
इस गरीब का चुम्बन याद आया होगा।
परमीत सिंह धुरंधर
तन्हाई में अब कभी याद कर लेती हैं वो पुराने गुजरे दिन,
अमीर की बीबी बनकर सेज पर शायद उन्हें,
इस गरीब का चुम्बन याद आया होगा।
परमीत सिंह धुरंधर
अधिकारों की मांग बस प्रतिकार से नहीं होगा,
प्रहार भी करना होगा उनपे,
उनके मनुहार और गुहार से नहीं होगा।
जो कहते हैं की ये बस गाँधी की देन है,
उन्हें गुलामी और आजादी के फर्क का,
कभी एहसास नहीं होगा।
उन्हें दिखा दो कभी तस्वीरें,
तिब्बत और दलाई लामा की,
फिर उन्हें अहिंसा से आजादी प्राप्ति का,
झूठा अभिमान नहीं होगा।
उन्हें भी एहसास है कहीं – ना – कहीं,
गाँधी जी की इस गलती का,
वरना छोड़ कर सारे क्रांतिकारियों को,
उनके लबों पे भगत सिंह का जय – जयकार नहीं होता।
अधिकारों की मांग बस प्रतिकार से नहीं होगा,
प्रहार भी करना होगा उनपे,
उनके मनुहार और गुहार से नहीं होगा।
परमीत सिंह धुरंधर
खेत में उड़Sता चिड़िया,
डाल पे झूलSता चिड़िया,
दाना – दाना चुग के,
देख अ चहकअता चिड़िया।
त आव अ ना गोरी कहिओ बथान में,
चहकल जाई दुनो गोरा साथ में,
बन के चिड़िया, बन के चिड़िया।
तिनका – तिनका तान के,
बनावे घोंसला।
गुटर – गुटर होइ जब,
छाई आई बदरा।
त आव अ ना गोरी कहिओ सजके बथान में,
गुटर – गुटर कइल जाए दुनो गोरा साथ में,
बन के चिड़िया,बन के चिड़िया।
Dedicated to Chipko Aandolan or Movement, India.
परमीत सिंह धुरंधर
अगर लालू भी पैदा हो,
तो कोई उसे हरा नहीं सकता।
बिहार की धरती को कोई,
बंजर बना नहीं सकता।
शुभारम्भ कैसा भी हो?
याद कर लो: गांधी का चम्पारण, जय प्रकाश नारायण।
शुभारम्भ कैसा भी हो?
किसी का भी हो,
बिहार से जुड़े बिना,
सफल हो नहीं सकता।
जो ये कहते है की,
सत्ता की चाभी यूपी से होक जाती है.
देख लो: नायडू को छोड़ सकते है, नितीश को नहीं।
उन्हें पता नहीं की एक बिहारी,
अयोग्य दामाद को अयोग्य बुला नहीं सकता।
परमीत सिंह धुरंधर
जाने कैसे इंसान थे वो जो फरिस्ते बन गए?
जुल्मों – सितम के आँगन में उनका,
गजब का संघर्ष रहा होगा।
परमीत सिंह धुरंधर
पुत्र वही जो पिता के अपने चरणों में अभिमान करे,
चाहे शिव ही साक्षात् समक्ष हो,
वो पिता का ही गुणगान करे.
कुछ मोल नहीं इस जग में,
चाहे अमृतवा का ही पान हो,
वीर वही जो पिता के पाने शत्रुओं का संहार करे.
परमीत सिंह धुरंधर
चोली के बटन तनी खोली ना बालम,
बानी अनाड़ी, ना देखीं ई जोवन।
एहि के पीछे बा सारा ज्वार,
बचइले बानी करके, का – का जतन.
का करेम कमा के अतना धन?
जे रतिया के, सेजिया पे ना होइ उधम.
अब त गूजें दी किलकारी अपनों आँगन,
चोली के बटन तनी खोली ना बालम।
परमीत सिंह धुरंधर
महान पिता का पुत्र कभी खोटा नहीं होता,
IRS/IAS होने से कोई ऊँचा नहीं होता।
कर्म ही किसी का उस गर्त तक ले जाता है,
जहाँ फैसला उसके शक्लों – सूरत पे नहीं होता।
परमीत सिंह धुरंधर
मत पूछ मेरे दिल से समुन्दर का पता,
वो बहता है इसी के हौसलों से यहाँ।
कब तक इंसान बैठेगा खुदा के भरोसे,
कभी -न – कभी हाथों में हल उठाना होगा।
अगर माँ बैठ जाएँ की खुदा पाल देगा बच्चो को,
तो ए मंदिरों, खुदा का नामों-निशान नहीं होगा।
वो बांटते हैं घूम-घूमकर चिट्ठी अपने माफ़ी की,
ये बता रहा है की उनकी औलादों का हुनर क्या होगा।
परमीत सिंह धुरंधर
चाहे कंगन हो या कमंडल हो,
राजपूतों के साथ दंगल और मंगल हो.
परमीत सिंह धुरंधर